भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८८ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश सिंह लग्न : पंचमभाव : राहु पाँचवें भाव में शत्रु गुरु की राशि पर स्थित नीच के राहु के प्रभाव से जातक को सन्तान-पक्ष से कष्ट मिलता है तथा विद्या की कमी रहती है। वह बुद्धि-बल से अपनी अयोग्यता को छिपाने का प्रयत्न करता है। परन्तु उसकी वाणी में विनम्रता, शिष्टता एवं सत्य का अभाव रहता है। वह गुप्त युक्तियों से स्वार्थ-सिद्धि करता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश सिंह लग्न : षष्ठभाव : राहु छठे भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक युक्ति-बल से शत्रु-पक्ष पर विजय प्राप्त करता है। कभी-कभी उसे शत्रुओं द्वारा अधिक परेशान भी किया जाता है। वह बड़ा हिम्मती, बहादुर, धैर्यवान् तथा साहसी होता है। झगड़े के समय वह अपनी बहादुरी का प्रदर्शन करता है। उसे अपनी ननसाल के पक्ष से हानि भी उठानी पड़ती है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश सिंह लग्न : सप्तमभाव : राहु सातवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की स्त्री-पक्ष से कष्ट मिलता है तथा दैनिक व्यवसाय के क्षेत्र में भी घोर परेशानियां आती रहती हैं, परन्तु वह बड़ी हिम्मत तथा धैर्य के साथ उनका मुकाबला करता है। कभी-कभी संकटों से बहुत घिर जाता है, किन्तु गुप्त युक्तियों द्वारा उन्हें पार कर जाता है।