भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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२८६ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश सिंह लग्न : अष्टमभाव : राहु आठवें भाव में शत्रु गुरु की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की अपने जीवन में अनेक बार मृत्यु- तुल्य कष्टों का सामना करना पड़ता है। उसके पेट के निम्न भाग में विकार रहता है तथा उसे चिन्ताएं एवं परेशानियां घेरे रहती हैं। उसे पुरातत्त्व की हानि भी उठानी पड़ती है।

'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश सिंह लग्न : नवमभाव : राहु नवें भाव में शत्रु मंगल की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की भाग्योन्नति में अनेक बार रुकावटें आती हैं तथा परेशानियां उठ खड़ी होती हैं। उसे धर्म-पालन में अरुचि रहती है। ऐसा व्यक्ति अपने भाग्य की वृद्धि के लिए अनेक प्रकार की युक्तियों का सहारा लेता है तथा धैर्यवान्, हिम्मती एवं साहसी होने के कारण परेशानियों की हटाने में कुछ सफल भी हो जाता है।

'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश सिंह लग्न : दशमभाव : राहु दसवें भाव में अपने मित्र शुक्र की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की पिता के सुख में कमी रहती है तथा राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। परन्तु गुप्त युक्तियों के बल पर वह अनेक कठिनाइयों को पार कर जाता है तथा कुछ उन्नति भी प्राप्त कर लेता है।