भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६५ 'कन्या' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डली संख्या ६६१ से ७६८ के बीच देखना चाहिए । गोचर-कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए । 'कन्या' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १—'कन्या' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६६१ से ६७२ के बीच देखना चाहिए । २—'कन्या' लग्न वालों को अपनी गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ६६१ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ६६२ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ६६३ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ६६४ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ६६५ (ख) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ६६६ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ६६७ (ख) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ६६८ (क) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ६६९ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ६७० (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ६७१ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ६७२ 'कन्या' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १