भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३३१ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'दशमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश कन्यालग्न : दशमभाव : राहु दसवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित उच्च 'राहु' के प्रभाव से जातक अपने पिता के साथ संघर्ष करता हुआ उन्नति करता है। राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भी उसे गुप्त युक्ति एवं चातुर्य के बल पर ही सम्मान एवं सफलता की प्राप्ति होती है। कभी-कभी संकट भी आते हैं, परन्तु फिर स्थिति ठीक ही आती है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'एकादशभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश कन्यालग्न : एकादशभाव : राहु ग्यारहवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक की आमदनी खूब रहती है, परन्तु कठिनाइयों का सामना भी बहुत करना पड़ता है। उसे कभी बहुत लाभ तो कभी बहुत घाटा होता है। वह अपनी गुप्त युक्तियों, धैर्य, साहस तथा परिश्रम के सहारे लाभ उठाता है, परन्तु कभी-कभी धोखा भी खा जाता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'द्वादशभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश कन्यालग्न : द्वादशभाव : राहु बारहवें भाव में शत्रु 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक को खर्च-सम्बन्धी कठिनाइयां बहुत रहती हैं तथा बाहरी सम्पर्कों से भी कष्ट होता है। ऐसा व्यक्ति गुप्त युक्तियों, धैर्य, साहस तथा परिश्रम के सहारे अपना खर्च चलाता है। कभी-कभी उसे आकस्मिक धन-लाभ भी हो जाता है।