भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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३३६ 'तुला' लग्न ७६६ ['तुला' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन] 'तुला' लग्न का फलादेश 'तुला' लग्न में जन्म लेने वाला जातक गौर वर्ण, शिथिल शरीर तथा मोटी नाक वाला होता है। वह कफ प्रकृति वाला एव वीर्यविकारयुक्त भी होता है। ऐसा व्यक्ति गुणी, धनी, यशस्वी, परोपकारी, प्रियवादी, सत्यवादी, सतोगुणी, तीर्थ-प्रेमी, निर्लोभ, व्यवसाय-कुशल, ज्योतिषी, भ्रमणशील तथा अपने कुल का भूषण होता है। वह राज्य द्वारा सम्मानित, देव-पूजन में चित्त लगानेवाला तथा पर-स्त्रियों से प्रेम रखने वाला भी होता है। 'तुला' लग्न में जन्म लेने वाले जातक को अपनी आरम्भिक अवस्था में दुःख भोगना पड़ता है, मध्यमावस्था में वह सुख प्राप्त करता है तथा अन्तिमावस्था सामान्य स्थिति में बीतती है। 'तुला' लग्न के जातक का भाग्योदय ३१ अथवा ३२ वर्ष की आयु में होता है। 'तुला' लग्न वालों को अपनी जन्म-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डली संख्या ७७० से ८७७ के बीच देखना चाहिए। गोचर-कुण्डली से ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए।