भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७२ 'तुला' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश तुला लग्न : षष्ठभाव : राहु छठे भाव में शत्रु 'गुरु' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष में कठिनाइयाँ उठाकर भी विजय प्राप्त करता है । ऐसा व्यक्ति बड़ा बहादुर, हिम्मती तथा गुप्त युक्तियों का ज्ञाता होता है । अपना प्रभाव स्थापित करने में उसे सफलता मिल जाती है । 'तुला' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश तुला लग्न : सप्तमभाव : राहु सातवें भाव में शत्रु 'मंगल' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक को स्त्री-पक्ष से संकटों का सामना करना पड़ता है तथा दैनिक व्यवसाय के क्षेत्र में भी कठिनाइयाँ आती हैं । व्यवसाय में भी कभी-कभी बड़े संकट आते हैं, परन्तु यह अपनी गुप्त युक्ति, धैर्य और साहस के बल पर उन सभी बाधाओं पर विजय प्राप्त कर लेता है । 'तुला' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश तुला लग्न : अष्टमभाव : राहु आठवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक को आयु पर उसे बड़े संकट आते हैं, परन्तु मृत्यु नहीं होती । पुरातत्त्व की हानि भी होती है । दैनिक जीवन में भी अनेक संघर्ष, चिन्ता व परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।