भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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३७८ 'वृश्चिक लग्न' ['वृश्चिक' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन] 'वृश्चिक' लग्न का फलादेश 'वृश्चिक' लग्न में जन्म लेने वाला जातक ठिगने तथा स्थूल शरीर का होता है। उसकी आँखें गोल तथा छाती चौड़ी होती है। ऐसा व्यक्ति क्रोधी, पाखण्डी, मिथ्यावादी, तमोगुणी, कपटी, कड़वे स्वभाव का, पर-निन्दक, दयाहीन, भिक्षा-वृत्ति करने वाला, भाइयों से द्वेष रखने वाला, शत्रु-नाशक तथा सेवा-कर्म करने वाला होता है। परन्तु इसके साथ ही यह शास्त्रज्ञ, विद्या के आधिक्य से युक्त, गुणी, शूरवीर, अत्यन्त विचारशील तथा ज्योतिषी भी होता है। दूसरों के मन की बात जान लेने में वह बड़ा निपुण होता है।