भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८० 'वृश्चिक' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १. 'वृश्चिक' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ८९१ से ९०२ के बीच देखना चाहिए। २. 'वृश्चिक' लग्न वालों को गोचरकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस दिन 'चन्द्रमा'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ८९१ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ८९२ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ८९३ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ८९४ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ८९५ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ८९६ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ८९७ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ८९८ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ८९९ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ९०० (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ९०१ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ९०२ 'वृश्चिक' लग्न में 'मंगल' का फलादेश १. 'वृश्चिक' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित मंगल का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ९०३ से ९१४ के बीच देखना चाहिए। २. 'वृश्चिक' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित मंगल का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'मंगल'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ९०३ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ९०४ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ९०५ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ९०६ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ९०७ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ९०८ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ९०९