भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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३८१ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ६१० (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ६११ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ६१२ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ६१३ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ६१४ 'वृश्चिक' लग्न में 'बुध' का फलादेश १. 'वृश्चिक' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६१५ से ६२६ के बीच देखना चाहिए। २. 'वृश्चिक' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'बुध'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ६१५ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ६१६ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या ६१७ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या ६१८ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या ६१९ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या ६२० (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या ६२१ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या ६२२ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या ६२३ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या ६२४ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या ६२५ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या ६२६ 'वृश्चिक' लग्न में 'गुरु' का फलादेश १. 'वृश्चिक' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६२७ से ६३८ के बीच देखना चाहिए। २. 'वृश्चिक' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'गुरु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या ६२७ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या ६२८