भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८२ (ग) ‘मिथुन’ राशि पर हो तो संख्या ६२६ (घ) ‘कर्क’ राशि पर हो तो संख्या ६३० (ङ) ‘सिंह’ राशि पर हो तो संख्या ६३१ (च) ‘कन्या’ राशि पर हो तो संख्या ६३२ (छ) ‘तुला’ राशि पर हो तो संख्या ६३३ (ज) ‘वृश्चिक’ राशि पर हो तो संख्या ६३४ (झ) ‘धनु’ राशि पर हो तो संख्या ६३५ (ञ) ‘मकर’ राशि पर हो तो संख्या ६३६ (ट) ‘कुम्भ’ राशि पर हो तो संख्या ६३७ (ठ) ‘मीन’ राशि पर हो तो संख्या ६३८ ‘वृश्चिक’ लग्न में ‘शुक्र’ का फलादेश १. ‘वृश्चिक’ लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित ‘शुक्र’ का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६३९ से ६५० के बीच देखना चाहिए। २. ‘वृश्चिक’ लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित ‘शुक्र’ का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में ‘शुक्र’— (क) ‘मेष’ राशि पर हो तो संख्या ६३९ (ख) ‘वृष’ राशि पर हो तो संख्या ६४० (ग) ‘मिथुन’ राशि पर हो तो संख्या ६४१ (घ) ‘कर्क’ राशि पर हो तो संख्या ६४२ (ङ) ‘सिंह’ राशि पर हो तो संख्या ६४३ (च) ‘कन्या’ राशि पर हो तो संख्या ६४४ (छ) ‘तुला’ राशि पर हो तो संख्या ६४५ (ज) ‘वृश्चिक’ राशि पर हो तो संख्या ६४६ (झ) ‘धनु’ राशि पर हो तो संख्या ६४७ (ञ) ‘मकर’ राशि पर हो तो संख्या ६४८ (ट) ‘कुम्भ’ राशि पर हो तो संख्या ६४९ (ठ) ‘मीन’ राशि पर हो तो संख्या ६५० ‘वृश्चिक’ लग्न में ‘शनि’ का फलादेश १. ‘वृश्चिक’ लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित ‘शनि’ का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६५१ से ६६२ के बीच देखना चाहिए।