भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२५ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १०४१ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १०४२ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १०४३ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १०४४ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १०४५ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १०४६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १०४७ 'धनु' लग्न में 'शुक्र' का फलादेश १. 'धनु' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १०४८ से १०५६ के बीच देखना चाहिए। 'धनु' लग्नवालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १०४८ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १०४६ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १०५० (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १०५१ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १०५२ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १०५३ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १०५४ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १०५५ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १०५६ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १०५७ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १०५८ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १०५६ 'धनु' लग्न में 'शनि' का फलादेश १. 'धनु' लग्नवालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ६२४ से ६३५ के बीच देखना चाहिए। २. 'धनु' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि'