भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 454, कुल 638 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 454

४६३ 'मकर' लग्न ['मकर' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन] 'मकर' लग्न का फलादेश 'मकर' लग्न में जन्म लेने वाले जातक का शरीर लम्बा होता है। वह बड़ी-बड़ी आँखों वाला, उग्र स्वभाव का, निरन्तर पुरुषार्थ करने वाला, लोभी, चतुर, वंचक, ठग, पाखण्डी, आलसी, मनमौजी, तमोगुणी तथा कफ-वायु से पीड़ित रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति भीरु, सन्तोषी, खर्चीला, लज्जा-रहित, धर्म के विरुद्ध आचरण करने वाला, अधिक सन्ततिवान्, कवियों तथा स्त्रियों में आसक्त भी होता है। 'मकर' लग्न वाला जातक अपनी प्रारम्भिक अवस्था में सुख भोगता है, मध्यमावस्था में दुःख पाता है तथा ३२ वर्ष की आयु के बाद अन्तिम समय तक सुखी बना रहता है। ऐसे व्यक्ति की आयु पूर्ण होती है तथा उसका भाग्योदय प्रायः ३२-३५ वर्ष की अवस्था में होता है।

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक) · पृष्ठ 454, कुल 638 में से · BharatKosha