भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 455, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें४६४ 'मकर' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित- विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डलियों में संख्या ३३४ से ४४१ के बीच देखना चाहिए। गोचर कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए। ● 'मकर' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १—'मकर' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १०६७ से ११०८ के बीच देखना चाहिए। २—'मकर' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर स्थित हो तो संख्या १०६७ (ख) 'वृष' राशि पर स्थित हो तो संख्या १०६८ (ग) 'मिथुन' राशि पर स्थित हो तो संख्या १०६९ (घ) 'कर्क' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०० (ङ) 'सिंह' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०१ (च) 'कन्या' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०२ (छ) 'तुला' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०३ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०४ (झ) 'धनु' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०५ (ञ) 'मकर' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०६ (ट) 'कुम्भ' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०७ (ठ) 'मीन' राशि पर स्थित हो तो संख्या ११०८ 'मकर' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १—'मकर' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या ११०९ से ११२० के बीच देखना चाहिए। २—'मकर' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध'