भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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४६६ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मकर लग्न : षष्ठभाव : राहु छठे भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष पर अपना विशेष प्रभाव रखता है तथा झगड़ों के मामलों में सफलता प्राप्त करता है। वह कूटनीतिज्ञ, विवेकी, तीव्र-बुद्धि तथा गुप्त युक्तियों का जानकार होता है। ऐसा व्यक्ति प्रायः कभी बीमार नहीं होता। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मकर लग्न : सप्तमभाव : राहु सातवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक को स्त्री-पक्ष से महान् कष्ट होता है। व्यवसाय के क्षेत्र में भी कठिनाइयां आती रहती हैं। उसकी मूतेन्द्रिय में रोग भी होता है। वह अपनी गुप्त युक्तियों के बल से कठिनाइयों पर कुछ विजय भी पा लेता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मकर लग्न : अष्टमभाव : राहु आठवें भाव में शत्रु 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक के जीवन पर बड़े संकट आते हैं तथा कभी-कभी मृत्यु-तुल्य कष्ट भी भोगना पड़ता है। पुरातत्त्व की हानि भी होती है। उदर अथवा गुदा-सम्बन्धी रोगों का शिकार बनना पड़ता है। वह अपनी गुप्त युक्तियों के बल पर जैसे-तैसे जीवन-यापन करता है।