भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०४ 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश मकरलग्न : दशमभाव : केतु दसवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'केतु' के प्रभाव से जातक को पिता से कष्ट, राज्य से कठिनाइयाँ तथा व्यवसाय-क्षेत्र में संकटों का शिकार बनना पड़ता है, परन्तु अपनी गुप्त युक्तियों के बल पर वह उन पर विजय पा लेता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन संघर्षपूर्ण तथा परिवर्तनशील होता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश मकरलग्न : एकादशभाव : केतु ग्यारहवें भाव में शत्रु 'मंगल' की राशि पर स्थित 'केतु' के प्रभाव से जातक की आमदनी में अत्यधिक वृद्धि होती है। वह अपनी गुप्त युक्तियों, साहस एवं कठिन परिश्रम के बल पर आमदनी को निरन्तर बढ़ाता रहता है। आने वाली कठिनाइयों पर उसे विजय मिलती है। ऐसा व्यक्ति गुप्त रूप में चिन्तित भी बना रहता है। 'मकर' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'केतु' का फलादेश मकरलग्न : द्वादशभाव : केतु बारहवें भाव में शत्रु 'गुरु' की राशि पर स्थित 'केतु' के प्रभाव से जातक का खर्च अत्यधिक रहता है, परन्तु बाहरी स्थानों से उसे लाभ मिलता है। ऐसा व्यक्ति कठिनाइयों का साहस के साथ सामना करता है तथा अन्त में उन पर विजय भी पा लेता है। वह बड़ा परिश्रमी, धैर्यवान्, गुप्त युक्तियों से काम लेने वाला तथा साहसी होता है।