भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०५ 'कुम्भ' लग्न १२ ११ १० १ 'कुंभ'लग्न ९ २ ८ ३ ५ ७ ४ ६ १२०५ ['कुम्भ' लग्न की कुण्डलियों के विभिन्न ग्रहों में स्थित विभिन्न ग्रहों के फलादेश का पृथक्-पृथक् वर्णन] 'कुम्भ' लग्न का फलादेश 'कुम्भ' लग्न में जन्म लेने वाला व्यक्ति लम्बे शरीर वाला, मोटी गरदन वाला, गंजे सिर वाला, तेजस्वी, वात-प्रकृति वाला तथा चंचल स्वभाव का होता है। ऐसा व्यक्ति पानी अधिक पीता है। वह बातूनी, दम्भी, अहंकारी, ईर्ष्यालु, द्वेषी, सुस्थिर तथा भ्रातृ-द्रोही होने के साथ ही श्रेष्ठ मनुष्यों से संयुक्त, सर्वप्रिय, सुन्दर पानी वाला तथा पर-स्त्रियों में आसक्त भी होता है। 'कुम्भ' लग्न का जातक अपनी प्रारम्भिक अवस्था में दुःखी रहता है मध्यमावस्था में सुखी रहता है तथा अन्तिम अवस्था में धन, भूमि, भवन, पुत्रादि के सुख का उपभोग