भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०६ 'कुम्भ' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित विभिन्न ग्रहों का स्थायी फलादेश आगे दी गई उदाहरण-कुण्डली संख्या १२०६ से १३१३ के बीच देखना चाहिए। गोचर-कुण्डली के ग्रहों का फलादेश किन उदाहरण-कुण्डलियों में देखें, इसे आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए। 'कुम्भ' लग्न में 'सूर्य' का फलादेश १—'कुम्भ' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १२०६ से १२१७ के बीच देखना चाहिए। २—'कुम्भ' लग्न वालों को अपनी गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'सूर्य' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'सूर्य'— (क) 'मेष' राशि पर ही तो संख्या १२०६ (ख) 'वृष' राशि पर ही तो संख्या १२०७ (ग) 'मिथुन' राशि पर ही तो संख्या १२०८ (घ) 'कर्क' राशि पर ही तो संख्या १२०६ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १२१० (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १२११ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १२१२ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर ही तो संख्या १२१३ (झ) 'धनु' राशि पर ही तो संख्या १२१४ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १२१५ (ट) 'कुम्भ' राशि पर ही तो संख्या १२१६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १२१७ 'कुम्भ' लग्न में 'चन्द्रमा' का फलादेश १—'कुम्भ' लग्न वालों की अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'चन्द्रमा' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १२१८ से १२२९ के बीच देखना चाहिए। २—'कन्या' लग्न वालों की गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित