भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०८ 'कुम्भ' लग्न में 'बुध' का फलादेश १—'कुम्भ' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १२४२ से १२५३ के बीच देखना चाहिए। २—'कुम्भ' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'बुध' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'बुध'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १२४२ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १२४३ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १२४४ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १२४५ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १२४६ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १२४७ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १२४८ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १२४६ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १२५० (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १२५१ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १२५२ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १२५३ 'कुम्भ' लग्न में 'गुरु' का फलादेश १—'कुम्भ' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १२५४ से १२६५ के बीच देखना चाहिए। २—'कुम्भ' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस वर्ष में 'गुरु'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १२५४ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १२५५ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १२५६ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १२५७