भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५०६ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १२५८ (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १२५६ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १२६० (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १२६१ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १२६२ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १२६३ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १२६४ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १२६५ 'कुम्भ' लग्न में 'शुक्र' का फलादेश १—'कुम्भ' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शुक्र' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १२६६ से १२७७ के बीच देखना चाहिए । २—'कुम्भ' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'गुरु' का अस्थायी फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए— जिस महीने में 'शुक्र'— (क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या १२६६ (ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या १२६७ (ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या १२६८ (घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या १२६६ (ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या १२७० (च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या १२७१ (छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या १२७२ (ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या १२७३ (झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या १२७४ (ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या १२७५ (ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या १२७६ (ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या १२७७ 'कुम्भ' लग्न में 'शनि' का फलादेश १—'कुम्भ' लग्न वालों को अपनी जन्मकुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि' का स्थायी फलादेश उदाहरण-कुण्डली संख्या १२७८ से १२८६ के बीच देखना चाहिए । २—'कुम्भ' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित 'शनि'