भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६ मित्रक्षेत्रस्थ 'चन्द्र' मित्रक्षेत्रस्थ 'चन्द्र' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'चन्द्रमा' अपने मित्रग्रहों (सूर्य अथवा बुध) की राशि (सिंह, कन्या अथवा मिथुन) में बैठा हो, वह सुखी, धनी, गुणी, चतुर तथा भाग्यवान होता है। मित्रक्षेत्रस्थ 'मंगल' मित्रक्षेत्रस्थ 'मंगल' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'मंगल' अपने मित्र ग्रहों (सूर्य, चन्द्र अथवा गुरु) की राशि (सिंह, कर्क, धनु अथवा मीन) में बैठा हो, वह धनी, मित्र-प्रेमी, तेजस्वी, पराक्रमी, शक्तिशाली, शस्त्र द्वारा जीविकोपार्जन करने वाला तथा उग्र स्वभाव वाला होता है। मित्रक्षेत्रस्थ 'बुध' मित्रक्षेत्रस्थ 'बुध' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'बुध' अपने मित्रग्रहों (सूर्य अथवा शुक्र) की राशि (सिंह, वृष अथवा तुला) में बैठा हो, वह शास्त्रज्ञ, विनोदी-स्वभाव का, कार्यदक्ष, सुन्दरस्वरूप वाला, यशस्वी, ज्ञानी तथा धनवान् होता है। मित्रक्षेत्रस्थ 'गुरु' मित्रक्षेत्रस्थ 'गुरु' जिस जातक की जन्मकुण्डली में 'गुरु' अपने जिस ग्रहों (सूर्य, चन्द्र अथवा मंगल) की राशि (सिंह, कर्क, मेष अथवा वृश्चिक) में बैठा हो, वह सुखी, उन्नतिशील, बुद्धिमान, प्रसिद्ध यशस्वी, सत्कर्म करने वाला तथा श्रेष्ठ लोगों द्वारा पूजित होता है।