भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५८४ 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मीन लग्न : पंचमभाव : राहु पाँचवें भाव में शत्रु 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक को विद्याध्ययन में कठिनाइयाँ आती हैं तथा सन्तान-पक्ष से भी उसे कष्ट का अनुभव होता है। ऐसे व्यक्ति की वाणी में रूखापन होता है तथा मस्तिष्क में चिन्ताएँ घिरी रहती हैं। वह स्वार्थ-सिद्धि के लिए उचित-अनुचित एवं सत्यासत्य का विचार भी नहीं रखता। 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मीन लग्न : षष्ठभाव : राहु छठे भाव में शत्रु 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक शत्रु-पक्ष पर भारी प्रभाव रखता है तथा युक्ति-बल से शत्रुओं को परास्त करता है। फिर भी, शत्रु-पक्ष उसे बार-बार परेशान करता रहता है। ननसाल-पक्ष से भी कुछ हानि होती है। ऐसा व्यक्ति बड़ा हिम्मती, बहादुर, चतुर, धैर्यवान् तथा सावधान होता है। 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मीन लग्न : सप्तमभाव : राहु सातवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक की स्त्री-पक्ष से कुछ कष्ट मिलता है तथा दैनिक व्यवसाय में भी कुछ कठिनाइयों का अनुभव होता, परन्तु वह अपने युक्ति-बल एवं चातुर्य से उन पर विजय प्राप्त करता रहता है। गृहस्थ- जीवन में बार-बार आने वाले संकटों को भी दूर करता रहता है।