भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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५८५ 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मीन लग्न : अष्टमभाव : राहु आठवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक के जीवन पर अनेक बार कष्ट आते हैं, परन्तु आयु की वृद्धि में कमी नहीं आती। पुरातत्त्व के विषय में भी कठिनाई के योग उपस्थित होते हैं। परन्तु वह अपनी चतुराई से उन सबका निराकरण करके लाभ उठाता है। 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मीन लग्न : नवमभाव : राहु नवें भाव में शत्रु 'मंगल' की राशि पर स्थित 'राहु' के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म की उन्नति में बाधाएँ आती रहती हैं तथा यश की प्राप्ति भी नहीं होती। परन्तु वह कठिन परिश्रम, गुप्त युक्ति तथा हिम्मत के साथ भाग्योन्नति के लिए प्रयत्नशील बना रहता है। कभी-कभी उसे आकस्मिक लाभ भी होता है और कभी-कभी अत्यधिक कष्ट भी उठाने पड़ते हैं। लम्बे संघर्ष के बाद ही भाग्योन्नति ही पाती है। 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश मीन लग्न : दशमभाव : राहु दसवें भाव में शत्रु 'गुरु' की राशि पर स्थित मीन के 'राहु' के प्रभाव से जातक को पिता के पक्ष में महान् कष्ट, राज्य से परेशानी तथा व्यवसाय में बार- बार हानि का सामना करना पड़ता है। मान-प्रतिष्ठा में भी कमी रहती है। परन्तु वह अपने युक्ति-बल तथा परिश्रम से कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने का प्रयत्न करता रहता है और कुछ सफलता भी पा लेता है।