भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६८ गुरु और शुक्र (१६) गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक विद्वान्, बुद्धिमान्, गुणवान्, धर्मात्मा, शास्त्रज्ञ, शास्त्रार्थ करने वाला, अत्यन्त सुखी, यशस्वी, धनी तथा सुन्दरी स्त्री, पुत्र- मित्र आदि के सुख से युक्त होता है। गुरु और शनि (२०) गुरु और शनि की युति हो तो जातक शूर- वीर, यशस्वी, धनी, प्रधान सेनापति, कला-कुशल तथा स्त्री द्वारा इच्छित सुख प्राप्त करने वाला होता है। शुक्र और शनि (२१) शुक्र और शनि की युति हो तो जातक चपल- बुद्धि, आनन्दी, लवण तथा अम्लरस का प्रेमी, उन्मत्त- प्रकृति, शिल्प-आलेखन में प्रवीण तथा दारुण संग्राम करने वाला होता है। तीन ग्रहों की युति का फलादेश सूर्य : चन्द्र : मंगल (१) सूर्य, चन्द्र और मंगल की युति हो तो जातक शूरवीर, अस्त्रविद्या में कुशल, रक्त-विकार से ग्रस्त, स्त्री- हीन, दया-हीन तथा यन्त्रादि के निर्माण में कुशल होता है।