भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 589, कुल 638 में से

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५६६ सूर्य : चन्द्र : बुध (२) सूर्य, चन्द्र और बुध की युति हो तो जातक विद्वान्, धनवान्, प्रियवादी, प्रतापी, श्रेष्ठ कवि अथवा कथाकार, वाक्पटु, शास्त्रज्ञ, कलाकार, सभा-प्रिय तथा राजा का सेवक होता है। सूर्य : चन्द्र : गुरु (३) सूर्य, चन्द्र और गुरु की युति हो तो जातक धर्मरमा, स्थिर-बुद्धि, चंचल, चतुर, धूर्त, पर्यटन-प्रेमी, विद्वान्, सेना-कुशल, देव-ब्राह्मण का पूजक तथा राजा का मंत्री होता है। सूर्य : चन्द्र : शुक्र (४) सूर्य, चन्द्र और शुक्र की युति हो तो जातक सुन्दर, परम तेजस्वी, अत्यन्त प्रतापी, भाग्यवान्, व्यसनी, शत्रु-संहर्त्ता, दांतों के विकार से युक्त, परधनापहारी तथा धर्म में प्रीति न रखने वाला होता है। सूर्य : चन्द्र : शनि (५) सूर्य, चन्द्र और शनि की युति हो तो जातक अत्यन्त धूर्त, धर्म का पालन करने वाला, शील-रहित, सत्कर्म करने वाला, वेश्या-प्रेमी, ब्राह्मण तथा देवताओं का भक्त, व्यर्थ परिश्रम करने वाला, हाथी-घोड़ा पालने वाला तथा धातु-कर्म में कुशल होता है।

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