भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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६०० सूर्य : मंगल : बुध (६) सूर्य, मंगल और बुध की युति हो तो जातक साहसी, प्रबल पराक्रमी, निर्लज्ज, कठोर-प्रकृति, सलाह देने में चतुर तथा धन, स्त्री, पुत्र, मित्र आदि के सुख से युक्त होता है । १४४० सूर्य : मंगल : गुरु (७) सूर्य, मंगल और गुरु की युति हो तो जातक उदार-हृदय, प्रियवादी, सत्यवादी, उग्र-प्रकृति, सेनापति, नीतिज्ञ, श्रेष्ठ वक्ता, धनी, राजा का मंत्री तथा सब कार्यों के करने में कुशल होता है। १४४१ सूर्य : मंगल : शुक्र (८) सूर्य, मंगल और शुक्र की युति हो तो जातक सुन्दर, अत्यन्त चतुर, दयालु, गुणी, धनी, विनम्र, बहुत बोलने वाला, सुशील अथवा कुशील, कार्य-कुशल, नेत्र- रोगी, विषयासक्त तथा अपने कुल में श्रेष्ठ होता है। १४४२ सूर्य : मंगल : शनि (६) सूर्य, मंगल शनि की युति हो तो जातक मूर्ख, निर्धन, स्वजनों से तिरस्कृत, विकल, बन्धु-विहीन, कलह से व्याकुल, सघन रोमों वाला, रोगी तथा धन एवं पशुओं से रहित होता है। १४४३