भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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६२७ (१४) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तमभाव में 'मंगल' की स्थिति हो (चित्र १५५७), वह बाल-विधवा होती है। (१५) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तम भाव में 'शनि' की स्थिति हो तथा सभी पाप-ग्रहों की उस पर दृष्टि हो (चित्र १५५८), वह अनब्याही ही रह जाती है। यदि विवाह हो भी तो उसके पति की मृत्यु शीघ्र हो जाती है। (१६) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तम भाव में सभी पाप-ग्रह एकत्र हो गए हों (चित्र १५५६), वह अवश्य विधवा होती है। (१७) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तमभाव में शुभग्रह बलहीन हों तथा पाप-ग्रह भी हों (चित्र १५६०°), वह अपने पति को छोड़कर दूसरा पति करती है।