भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२८ (१८) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सप्तम भाव में एक पाप-ग्रह बलहीन बैठा हो और उसे कोई शुभ ग्रह देखता न हो (चित्र १५६१), उसे उसका पति त्याग देता है। (१९) जिस स्त्री की जन्म-कुण्डली के सातवें घर में चन्द्रमा के साथ मंगल की युति हो (चित्र १५६२), वह अपने पति की आज्ञा से पर- पुरुष-गमन करती है। (२०) जिस स्त्री की जन्मकुण्डली में मेष, वृश्चिक, मकर अथवा कुम्भ में से कोई लग्न हो और उसमें चन्द्रमा तथा शुक्र दोनों ही बैठे हों तथा उन पर पाप-ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो (चित १५६३), तो ऐसी स्त्री अपनी माता के साथ पर-पुरुष-गमन करती है। (२१) जिस स्त्री के जन्म-लग्न में चन्द्रमा और शुक्र दोनों बैठे हों (चित्र १५६४), वह ईर्ष्यालु स्वभाव वाली, दूसरों को सन्ताप देने वाली तथा स्वयं सदैव सुखी रहने वाली होती है।