भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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६२६ (२२) जिस स्त्री के जन्म-लग्न में बुध तथा चन्द्रमा दोनों यह बैठे हों (चित्र १५६५), वह संगीत-कुशल, सुखी, गुणवती, सुन्दरी तथा सब को प्रिय होती है। (२३) जिस स्त्री के जन्म-लग्न में बुध, शुक्र तथा चन्द्रमा—तीनों ही ग्रह बैठे हुए हों (चित्र १५६६), वह अनेक प्रकार के सुखों से युक्त, धनी तथा गुणवती होती है। (२४) जिस स्त्री की कुण्डली में लग्न से आठवें स्थान पर (अष्टम भाव में) कोई पाप-ग्रह बैठा हो तथा दूसरे स्थान में कोई शुभग्रह बैठा हो, (चित्र १५६७), वह अपने पति से पहले मृत्यु को प्राप्त होती है। (२५) जिस स्त्री की जन्मकुण्डली में वृष, वृश्चिक, सिंह अथवा कन्या—इनमें से किसी भी राशि पर चन्द्रमा स्थित हो (चित्र १५६८), वह अल्प-पुत्रवती होती है।