भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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६४१ (४०) शुक्र नवम भाव में हो, चन्द्रमा दशम भाव में हो तथा अन्य सभी ग्रह एकादश भाव में हों तो ऐसा जातक राजा होता है। (४१) राहु तथा मगल षष्ठ भाव में हों तथा बुध और सूर्य दशम भाव में हों, तो जातक राजा होता है। (४२) वृष में बुध, मिथुन में चन्द्रमा, मकर में मंगल, सिंह में शनि, कन्या में सूर्य और बुध तथा तुला में शुक्र हो, तो जातक महाराजा होता है। (४३) वृहस्पति उच्च का होकर लग्न में बैठा हो तथा अन्य सभी गृह बुरे भी हों, तो भी जातक दीर्घायु, सेनापति, धनी, सुखी राजमान्य होता है।