भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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६४२ (४४) धनु का मंगल और शुक्र, मीन का बृहस्पति, तुला का बुध तथा नीच के शनि और चन्द्रमा हों, तो ऐसा जातक धनहीन राजा होता है। (४५) मीन का शुक्र अथवा बुध हो, द्वितीय भाव में राहु तथा लग्न में सूर्य हो तो जातक भोगी, दानी, यशस्वी, राजमान्य एवं पृथ्वी का स्वामी होता है। (४६) तृतीय भाव में गुरु तथा एकादश भाव में चन्द्रमा हो, तो जातक सब राजाओं में प्रसिद्ध राजा होता है। (४७) पंचम भाव में बुध तथा दशम भाव में चन्द्रमा हो, तो जातक अपने वंश का पालन करने वाला, बुद्धिमान्, जितेन्द्रिय तथा तपस्वी राजा होता है।