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बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)

बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)

Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा

DevanagariHindipublished152 पृष्ठ

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अनेकवर्णमध्यमाहरणभेदाः । १०७ उदाहरणम् । घनवर्गयुतिर्वर्गो ययो राश्योः प्रजायते । समासोऽपि ययोर्वर्गस्तौ राशी शीघ्रमानय ॥ २ ॥ अत्र राशी या १, का १ । अनयोर्वर्गघनयोर्योगः याव १ काघ १ अयं वर्ग इति नीलकवर्गसमं कृत्वा पक्षयोः कालकघनं प्रक्षिप्य नीलकपक्षस्य मूलम् नी १ । परपक्षस्यास्य याव १ काघ १ वर्गप्र- कृत्या मूले तत्र यावत्तावद्वर्गे योऽङ्कः सा प्रकृतिः शेषं क्षेपः प्रकल्प्यः । प्रकृति याव १ । क्षेपः काघ १ । “इष्टभक्तो द्विधा क्षेपः” इत्यादिना कालकेनेष्टेन जाते मूले क= (काव १ का १ं)/२, ज्ये= (काव १ का १)/२ । कनिष्ठ यावत्तावन्मानं तेनो- स्थाप्य जातौ राशी (काव १ का १ं)/२, का १ । अनयोः समासः (काव १ का १)/२ अयं वर्ग इति पीतक

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