भारतकोश
बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)

बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)

Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा

DevanagariHindipublished152 पृष्ठ

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१६ बीजगणिते अत्र भाजके त्रिमितकरण्या ऋणत्वं प्रकल्प्य क १८ क ३ं । अनेन भाज्ये गुणिते योगे च कृते जातम् । क ५६२५ क ६७५ । भाजके च क २२५ अनया भाज्ये हृते लब्धम् क २५ क ३। द्वितीयोदाहरणे न्यासः—भाज्यः क २५६ क ३०० । भाजकः क० २५ क २७ । अत्र भाजके पञ्चविंशतिकरण्या धनत्वं प्रकल्प्य क २५ क २७ भाज्ये गुणिते धनर्णकरणीनामन्तरे च कृते जातम् क १०० क १२ । भाजके च क ४ अनया भाज्ये हृते लब्धम् क २५ क ३। इदानीं पूर्वोदाहरणे गुण्ये भाजके कृते न्यासः—भाज्यः क ९ क ४५० क ७५ क ५४ । भाजकः क २५ क ३। अत्रापि त्रिमितकरण्या ऋणत्वं प्रकल्प्य भाज्ये गुणिते युते च जा- तम् क ८७१२ क १४५२ । भाजके च क ४८४ अनया हृते भाज्ये लब्धो गुणकः क १८ क ३ । पूर्वं गुणके खण्डत्रयमासीदिति योगकरणीयम् क १८ विश्लेष्या । तत्र "वर्गेण योगकरणी विहृता विशुद्धयेत्" इति नवात्मकषवर्गेण ९ विहृता सती शुध्यतीति लब्धं २ नयानां मूलम् ३ अस्य खण्डे १ । २ अनयोः कृतौ १ । ४ पूर्वलब्ध्या २ गुणिते २ । ८ एवं जातो गुणकः क २ क ३ क ८। इति करणीभजनम् । करणीवर्गादेरुदाहरणम्— द्विकत्रिपञ्चप्रमिताः करण्यस्तासां कृतिं त्रिद्विकसंख्ययोश्च । षट्पञ्चकत्रिद्विकसंमितानां पृथक् पृथङ्मे कथयाशु विद्वन् ॥ अष्टादशाष्टद्विकसंमितानां कृतीश्शतानां च सखे पदानि । १ न्यासः । प्रथमः क २ क ३ क ५ । द्वितीयः क ३ क २ । तृतीयः क ६ क ५ क ३ क २ चतुर्थः क १८ क ८ क २ । "स्थाप्योऽन्त्यवर्गश्च चतुर्गु णान्त्यान्निघ्नाः" इत्यनेन गुण्यः पृथ- ग्गणकखण्डसम इत्यनेन वा जाताः क्रमेण वर्गाः । प्रथम. रू १० क २४ क ४० क ६० । द्वितीयः रू ५ क २४ । तृतीयः रू १६ क १२०