भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

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पृष्ठ 199
  • ६३ - सद् मत पाछा^१ जै हुलई^२ । तिहि पर उजग काइ करेइ^३ ॥ सावण पासइ पइ छोडीय^४ चार । पीय विण जीविजइ बिसइ^५ आधारि ॥ सह को^६ रोलइ^७ कालवी । सउहं^८ चोटीय^९ कमेदोय पंडिया^१० जाफ ॥ दावीदा^११ पीय पीय करइ । मोनहं असप^१२ जायई^१३ सारण मात ॥ १. ग्र० २ ग्रा० ६ सदी मतझाला । २ ग्र० २ उयु धलई ग्रा० ६ घुरै जित । ३. ग्र० २ काई पैरस तते, ग्र० ६ काइ करेस । यह छंद ग्र० २ खंड ३ में १७, ग्र० ६ खंड ३ में १५, ग्रा० ६ में १३० ग्रा० १२ में ११८ है। लेकिन ग्र० २ और ग्रा० ६ में उपर्युक्त छंद की ३ और ४ के बीच निम्न पंक्तियाँ और हैं:— १. 'कोइल बोलइ छइ अंबरी डाल । २. मोर टहूकइ सपी डूंगरा।' इस छंद की पाचवीं पंक्ति ग्रा० १२ में नहीं है । ४ ग्र० २ छाडीय, ग्र० १२ छोटीय । ५ ग्र० २ कवणा, ग्रा० १२ किसै । ६. ग्र० २ सपीयलै, ग्रा० ६ सदी समाणो, ग्र० १२ सहुको । ७. ग्रा० ६ रमइ, ग्र० १२ पेलै । ८ ग्र० २ ग्रा० ६ (में नहीं है) । ६. ग्रा० ६ पलेहए । १०. ग्र० २ पंडिय, ग्रा० ६ माहो । ११. ग्र० २ पपीहा, ग्रा० ६ दापदियो ग्रा० पावहिंया, ग्रा० १२ दावीहो । १२. ग्र० २ असलस, ग्र० ६ असलास । १३. ग्रा० १२ लजायै । यह छंद ग्र० २ खंड ३ में १८, ग्रा० ६ राड ३ में १६, ग्रा० ६ में १३१, ग्रा० १२ में ११९ है ।