बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
DevanagariHindipublished315 पृष्ठ
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- ५८ - बताया जाता है। राजमती पांडे से कहती है कि उसके प्रिय को पहचानने का निशान यही है कि उसका प्रिय बीसलदेव बाइस वर्ष का जवान है। यद्यपि बीसलदेव की यह अवस्था श्री सत्यजीवन जी वर्मा को किसी अंश तक मान्य नहीं है फिर भी उन्हें कवि नाहड़ के कथन में इस बात का अंश दिखाई पड़ता है। वे कहते हैं कि "बीसलदेव अधिक अवस्था को प्राप्त होकर नहीं मरा, क्योंकि उसका पुत्र उसकी मृत्यु के समय अल्प अवस्था का था।"" इसमें सन्देह नहीं कि बीसलदेव के पुत्र अपरगांगेय की मृत्यु अल्प अवस्था में हुई जैसा कि इतिहास से सिद्ध होता है लेकिन इससे इस निष्कर्ष पर पहुँचना कि बीसल- देव की अवस्था भी छोटी थी उचित नहीं जान पड़ता। बीसलदेव की अवस्था का हिसाब किसी हद तक लगाना सम्भव था यदि हमें इतिहास में उसके पिता की अवस्था का कोई उल्लेख मिलता। यों इतिहास में अर्णोराज (बीसलदेव चतुर्थ के पिता) का राज्यकाल वि० सं० ११९७ से १२०८ तक माना गया है जो गणना करने पर ११ वर्ष होता है। और इसी प्रकार बीसलदेव चतुर्थ का भी राज्यकाल वि० सं० १२१० से १२२१ तक माना जाता है जो गणना करने पर ११ वर्ष होता है। यदि बीसलदेव रासो में दी हुई बीसलदेव की अवस्था उड़ीसा गमन के समय २२ वर्ष की मानी जाय तो यह मानना पड़ेगा कि उसका जन्म वि० सं० ११९७ से पूर्व हुआ होगा जो कि पूर्ण रूप से कल्पना पर आधारित होगा। और यदि उसका जन्म काल उसके पिता के राज्यारम्भ में माना जाय तो यह भी स्वीकार करना पड़ेगा कि उसकी मृत्यु २२ वर्ष की अवस्था में हुई होगी। ऐसी स्थिति में बारह वर्षों तक उसका उड़ीसा में रहना अथवा उसकी अवस्था का २२ वर्ष का उल्लेख सब कुछ कवि कल्पना ठहरता है। उचित तो यह जान पड़ता है कि २२ वर्ष की अवस्था के उल्लेख से कवि का तात्पर्य उसकी युवावस्था से है। तीसरा प्रसंग बीसलदेव रासो में आनासागर के उल्लेख का है जो कि बीसलदेव को 'धार' से लौटते समय रास्ते में मिला था। इस घटना को सत्य का रूप देकर बीसलदेव रासो के नायक को बीसलदेव चतुर्थ बताने वाले विद्वानों ने यह तर्क उपस्थित किया है कि चूंकि आनासागर बीसलदेव चतुर्थ के पिता अर्णोराज ने बनवाया था और वह बीसलदेव तृतीय के समय वर्तमान नहीं था इसलिये बीसलदेव रासो के नायक बीसलदेव चतुर्थ थे नकि बीसलदेव १- बीसलदेव रासो स० सत्यजीवन वर्मा-पृ० २४ भूमिका।