संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें- राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा अश्वमेध-यज्ञ तथा पुरुषोत्तम-प्रासाद-निर्माणका कार्य * | १०५ ---|---
धारण करनेवाले हैं। सब लक्षणोंसे सम्पन्न, समस्त इन्द्रियोंसे रहित, कूटस्थ अविचल, सूक्ष्म, ज्योतिः-स्वरूप, सनातन, भाव और अभावसे मुक्त, व्यापक तथा प्रकृतिसे परे हैं। सबको सुख देनेवाले सामर्थ्यशाली ईश्वर हैं। आप भगवान् जगन्नाथको मैं नमस्कार करता हूँ।
भगवान् विष्णु कहते हैं— महाभागे ! यमराजको हाथ जोड़े मस्तक झुकाये खड़ा देख मैंने उनसे स्तोत्र कहनेका कारण पूछा—'महाबाहु सूर्यनन्दन ! तुम सब देवताओंमें श्रेष्ठ हो। तुमने इस समय मेरी स्तुति किस लिये की है ? संक्षेपसे बताओ।'
धर्मराज बोले— भगवन् ! इस विख्यात पुरुषोत्तम-तीर्थमें जो इन्द्रनील मणिकी बनी हुई श्रेष्ठ प्रतिमा है, वह सब कामनाओंको देनेवाली है। उसका अनन्य भाव तथा श्रद्धासे दर्शन करके सभी मनुष्य कामनारहित हो आपके श्वेतधाममें चले जाते हैं। अतः अब मैं अपना व्यापार नहीं चला सकता। प्रभो ! आप कृपा करके उस प्रतिमाको समेट लीजिये।
धर्मराजका यह वचन सुनकर मैंने उनसे कहा—'यम ! मैं सब ओरसे बालूके द्वारा उस प्रतिमाको छिपा दूँगा।' तदनन्तर वह प्रतिमा छिपा दी गयी। अब उसे मनुष्य नहीं देख पाते थे। उसे छिपा देनेके बाद मैंने यमराजको दक्षिण दिशामें भेज दिया।
ब्रह्माजी कहते हैं— पुरुषोत्तमतीर्थमें इन्द्रनीलमयी प्रतिमाके लुप्त हो जानेपर आगे चलकर जो-जो बातें हुईं, उन सबको भगवान् विष्णुने लक्ष्मीदेवीसे विस्तारपूर्वक कह सुनाया।
राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा अश्वमेध-यज्ञ तथा पुरुषोत्तम-प्रासाद-निर्माणका कार्य
मुनियोंने कहा—'भगवन् ! अब हम राजा इन्द्रद्युम्नका शेष वृत्तान्त सुनना चाहते हैं। उस श्रेष्ठ तीर्थमें जाकर उन्होंने क्या किया ?
ब्रह्माजी बोले— मुनिवरो ! सुनो, मैं उस क्षेत्रके दर्शन और राजाके कृत्यका संक्षेपसे वर्णन करता हूँ। उस त्रिभुवनविख्यात पुरुषोत्तमक्षेत्रमें जाकर महाराज इन्द्रद्युम्नने रमणीय स्थानों और नदियोंका दर्शन किया। वहाँ एक बड़ी पवित्र नदी बहती है, जो विन्ध्याचलकी घाटीसे निकली है। वह स्चित्रोत्पलाके नामसे विख्यात, सब पापोंको दूर करनेवाली तथा कल्याणमयी है। उसका स्रोत बहुत बड़ा है। उसकी महत्ता गङ्गाजीके समान है। वह दक्षिणसमुद्रमें मिली है। वह पुण्यसलिला सरिता महानदीके नामसे भी विख्यात है। उसके दोनों किनारोंपर अनेकों गाँव और नगर बसे हुए हैं। वे सभी गाँव अच्छी फसल होनेके कारण