संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 140, कुल 434 में से
संदर्भ में पढ़ें१३८ * संक्षिप्त ब्रह्मपुराण *
मधुसूदन!!! आपके चरणोंमें यह पाद्य (पाँव पखारनेके लिये जल) समर्पित है, आप इसे स्वीकार करें। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको बारम्बार नमस्कार है।'
मधुपर्क-मन्त्र
मधुपर्कं महादेव ब्रह्माद्यैः कल्पितं तव।
मया निवेदितं भक्त्या गृहाण पुरुषोत्तम॥
ॐ नमो नारायणाय नमः।
'महादेव! पुरुषोत्तम! ब्रह्मा आदि देवताओंने आपके लिये जिसकी व्यवस्था की थी, वही मधुपर्क मैं भक्तिपूर्वक आपको निवेदन करता हूँ, कृपया स्वीकार कीजिये। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको बारम्बार नमस्कार है।'
आचमनीय-मन्त्र
मन्दाकिन्याः सितं वारि सर्वपापहरं शिवम्।
गृहाणाचमनीयं त्वं मया भक्त्या निवेदितम्॥
ॐ नमो नारायणाय नमः
'भगवन्! मैंने गङ्गाजीका स्वच्छ जल, जो सब पापोंको दूर करनेवाला तथा कल्याणमय है, आचमनके लिये भक्तिपूर्वक आपको अर्पित किया है; कृपया ग्रहण कीजिये। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको नमस्कार है।'
स्नान-मन्त्र
त्वमापः पृथिवी चैव ज्योतिस्त्वं वायुरेव च।
लोकेश वृत्तिमात्रेण वारिणा स्नापयाम्यहम्॥
ॐ नमो नारायणाय नमः।
'लोकेश्वर! आप ही जल, पृथ्वी तथा अग्नि और वायुरूप हैं। मैं जीवनरूप जलके द्वारा आपको स्नान कराता हूँ। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको नमस्कार है।'
वस्त्र-मन्त्र
देवतत्त्वसमायुक्त यज्ञवर्णसमन्वित।
स्वर्णवर्णप्रभे देव वाससी तव केशव॥
ॐ नमो नारायणाय नमः।
'देवतत्त्वसमायुक्त, यज्ञवर्णसमन्वित केशव! मैं सुनहरे रंगके दो वस्त्र आपकी सेवामें समर्पित करता हूँ। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको नमस्कार है।'
विलेपन-मन्त्र
शरीरं ते न जानामि चेष्टां चैव न केशव।
मया निवेदितो गन्धः प्रतिगृह्य विलिप्यताम्॥
ॐ नमो नारायणाय नमः।
'केशव! मुझे आपके शरीर और चेष्टाका ज्ञान नहीं है; मैंने जो यह गन्ध (रोली-चन्दन आदि) निवेदन किया है, इसे लेकर अपने अङ्गमें लगा लें। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको बारम्बार नमस्कार है।'
यज्ञोपवीत-मन्त्र
ऋग्यजुःसाममन्त्रेण त्रिवृतं पद्मयोनिना।
सावित्रीग्रन्थिसंयुक्तमुपवीतं तवार्पये॥
ॐ नमो नारायणाय नमः।
'भगवन्! ब्रह्माजीने ऋक्, यजुः और सामवेदके मन्त्रोंसे जिसको त्रिवृत् (त्रिगुण) बनाया है, वह सावित्री-ग्रन्थिसे युक्त यज्ञोपवीत मैं आपकी सेवामें अर्पित करता हूँ। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको बारम्बार नमस्कार है।'
अलंकार-मन्त्र
दिव्यरत्नसमायुक्त वह्निभानुसमप्रभ।
गात्राणि तव शोभन्तु सालंकाराणि माधव॥
ॐ नमो नारायणाय नमः।
'अग्नि और सूर्यके समान प्रभाववाले, दिव्यरत्नविभूषित माधव! इन अलंकारोंको धारण करके आपके श्रीअङ्ग सुशोभित हों। सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीनारायणको बारम्बार नमस्कार है।'
'ॐ नमः' यह अष्टाक्षर-मन्त्रके प्रत्येक अक्षरके साथ लगाकर पृथक्-पृथक् पूजा करे अथवा समस्त मूल-मन्त्रका एक ही साथ उच्चारण करके पूजन करे।