भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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२४४ * संक्षिप्त ब्रह्मपुराण *

करते हैं। उस तीर्थमें स्नान करके मनुष्य भवबन्धनसे मुक्त हो जाता है। वहाँका इतिहास बतलाता हूँ, जो भोग और मोक्ष देनेवाला है। पूर्वकालमें सत्ययुगके आरम्भमें ब्रह्माण्डके भीतर अनेक रूपधारी राक्षस उत्पन्न हुए, जो सामवेदका गान करनेवाले थे। वे बलोन्मत्त राक्षस हाथमें आयुध धारण किये मुझे खा जानेके निमित्त आये। उस समय मैंने अपनी रक्षाके लिये जगद्गुरु भगवान् विष्णुको पुकारा। उन्होंने अपने चक्रसे राक्षसोंका संहार करके पातालको निष्कण्टक और स्वर्गको शत्रुशून्य बना दिया। फिर उन्होंने अत्यन्त हर्षमें भरकर शङ्ख बजाया, जिससे समस्त राक्षस नष्ट हो गये। श्रीविष्णुके शङ्खके प्रभावसे जिस स्थानपर यह घटना हुई, वह शङ्खतीर्थ कहलाया, जो मनुष्योंके लिये सब प्रकारसे कल्याणकारक, समस्त अभीष्ट वस्तुओंका दाता, स्मरणमात्रसे मङ्गलदायक, आयु और आरोग्यका जनक तथा लक्ष्मी और पुत्रकी वृद्धि करनेवाला है। उसके माहात्म्यके स्मरण अथवा पाठमात्रसे मनुष्य समस्त अभिलषित वस्तुओंको प्राप्त कर लेता है।

किष्किन्धातीर्थ और व्यासतीर्थकी महिमा

**ब्रह्माजी कहते हैं—**किष्किन्धातीर्थ बहुत विख्यात है। वह मनुष्योंकी सम्पूर्ण कामनाओंको पूर्ण करनेवाला और समस्त पापोंको शान्त करनेवाला है। वहाँ भगवान् शंकर निवास करते हैं। नारद! उस तीर्थके स्वरूपका वर्णन करता हूँ, भक्तिपूर्वक सुनो। पूर्वकालमें दशरथनन्दन भगवान् श्रीरामने किष्किन्धानिवासी वानरोंको साथ लेकर जब समस्त लोकोंको रुलानेवाले रावणको युद्धमें सेना और पुत्रोंसहित मार डाला, तब सीताको पुनः प्राप्त करके अपने भाई लक्ष्मण, महाबली वानर, बलवान् विभीषण और देवताओंके साथ वे स्वस्तिवाचनपूर्वक पुष्पकविमानसे अयोध्याकी ओर लौटे। पुष्पकविमान कुबेरका था। वह शीघ्रगामी और इच्छानुसार चलनेवाला था। भगवान् राम शत्रुओंका संहार करनेवाले और शरणार्थी पुरुषोंको शरण देनेवाले थे। उन्होंने विमानसे अयोध्या लौटते समय मार्गमें लोकपावनी गौतमी गङ्गाको देखा, जो समस्त अभीष्ट वस्तुओंको देनेवाली तथा मन और नेत्रोंके संतापका निवारण करनेवाली हैं। गङ्गाजीका दर्शन करके महाराज श्रीराम उनके तटपर उतरे और हनुमान् आदि सम्पूर्ण वानरोंको सम्बोधित करके हर्षगद्गद वाणीमें कहने लगे—'ये गौतमी गङ्गा सम्पूर्ण जीवोंकी जननी हैं। ये भोग तो देती ही हैं, मोक्ष भी दे सकती हैं। भयंकर पापोंका भी संहार कर