संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८८ * संक्षिप्त ब्रह्मपुराण *
थीं। वसुदेवजीने चुपकेसे अपने बालकको यशोदाकी शय्यापर सुला दिया और कन्याको लेकर तुरंत लौट आये। जागनेपर यशोदाने देखा—'मेरे नील कमलके समान श्यामसुन्दर बालक हुआ है।' इससे उन्हें बड़ी प्रसन्नता हुई। वसुदेवजी भी कन्याको लेकर अपने घर लौट आये और देवकीकी शय्यापर उसे सुलाकर पहलेकी भाँति बैठ रहे। इतनेमें ही बालकके रोनेका शब्द सुनकर पहरा देनेवाले द्वारपाल सहसा उठकर खड़े हो गये। उन्होंने देवकीके संतान होनेका समाचार कंससे निवेदन किया। कंसने शीघ्र ही वहाँ पहुँचकर उस बालिकाको उठा लिया। देवकी रूँधे हुए कण्ठसे 'छोड़ो, छोड़ दो इसे' यों कहकर उसे रोकती ही रह गयीं। कंसने उस कन्याको एक शिलापर दे मारा; किंतु वह आकाशमें ही ठहर गयी और आयुधोंसहित आठ बड़ी-बड़ी भुजाओंवाली देवीके रूपमें प्रकट हुई। उसने ऊँचे स्वरसे अट्टहास किया और कंससे रोषपूर्वक कहा—'ओ कंस! मुझे पटकनेसे क्या लाभ हुआ। जो तेरा वध करेंगे, वे प्रकट हो चुके हैं। देवताओंके सर्वस्वभूत वे श्रीहरि पूर्वजन्ममें भी तेरे काल थे। इन सब बातोंपर विचार करके तू शीघ्र ही अपने कल्याणका उपाय कर।' यों कहकर देवी कंसके देखते-देखते आकाशमार्गसे चली गयी। उसके शरीरपर दिव्य हार, दिव्य चन्दन और दिव्य आभूषण शोभा पा रहे थे और सिद्धगण उसकी स्तुति करते थे।
तदनन्तर कंसके मनमें बड़ा उद्वेग हुआ। उसने प्रलम्ब और केशी आदि समस्त प्रधान असुरोंको बुलाकर कहा—'महाबाहु प्रलम्ब! केशी! धेनुक! और पूतना! अरिष्ट आदि अन्य सब वीरोंके साथ तुमलोग मेरी बात सुनो। दुरात्मा देवताओंने मुझे मार डालनेका यत्न प्रारम्भ किया है। किंतु वे मेरे पराक्रमसे भलीभाँति पीड़ित हो चुके हैं। अतः मैं उन्हें वीरोंकी श्रेणीमें नहीं गिनता। दैत्यवीरो! मुझे तो कन्याकी कही हुई बात आश्चर्य-सी प्रतीत होती है। देवता मेरे विरुद्ध प्रयत्न कर रहे हैं—यह जानकर मुझे हँसी आ रही है। तथापि दैत्येश्वरो! अब हमें उन दुष्टोंका और अधिक अपकार करनेकी चेष्टा करनी चाहिये। देवकीके गर्भसे उत्पन्न हुई बालिकाने यह भी कहा है कि 'भूत, भविष्य और वर्तमानके स्वामी विष्णु, जो पूर्वजन्ममें भी मेरी मृत्युके कारण बन चुके हैं, कहीं-न-कहीं उत्पन्न हो गये।' अतः इस भूतलपर बालकोंके दमनका हमें विशेष प्रयत्न करना चाहिये। जिस बालकमें बलकी अधिकता जान पड़े, उसे यत्नपूर्वक मौतके घाट उतार देना चाहिये।'
असुरोंको ऐसी आज्ञा देकर कंस अपने घर गया और विरोध छोड़कर वसुदेव तथा देवकीसे बोला—'मैंने आप दोनोंके इतने बालक व्यर्थ ही मारे। मेरे नाशके लिये तो कोई दूसरा ही बालक