भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 405
  • श्रीविष्णुमें भक्ति होनेका क्रम और कलि-धर्मका निरूपण * ४०३

तपस्वी-जनोंकी भाँति मूल-फल और पत्ते खाकर रहेंगे और कितने ही आत्मघात कर लेंगे। कलिमें सदा अकाल ही पड़ता रहेगा। सब लोग सदा असमर्थ होकर क्लेश भोगेंगे। कभी किन्हीं मानवोंको थोड़ा सुख भी मिल जायगा। सब लोग बिना स्नान किये ही भोजन करेंगे। अग्निहोत्र, देवपूजा, अतिथि-सत्कार, श्राद्ध और तर्पणकी क्रिया कोई नहीं करेंगे। कलियुगकी स्त्रियाँ लोभी, नाटी, अधिक खानेवाली, बहुत संतान पैदा करनेवाली और मन्द भाग्यवाली होंगी। वे दोनों हाथोंसे सिर खुजलाती रहेंगी। गुरुजनों तथा पतिकी आज्ञाका भी उल्लङ्घन करेंगी तथा पर्देके भीतर नहीं रहेगी। अपना ही पेट पालेंगी, क्रोधमें भरी रहेंगी। देह-शुद्धिकी ओर ध्यान नहीं देंगी और असत्य एवं कटु वचन बोलेंगी। इतना ही नहीं, वे दुराचारिणी होकर दुराचारी पुरुषोंसे मिलनेकी अभिलाषा करेंगी। कुलवती स्त्रियाँ भी अन्य पुरुषोंके साथ व्यभिचार करेंगी। ब्रह्मचारी लोग वेदोक्त व्रतका पालन किये बिना ही वेदाध्ययन करेंगे। गृहस्थ पुरुष न तो हवन करेंगे और न सत्पात्रको उचित दान ही देंगे। वानप्रस्थ आश्रममें रहनेवाले लोग वनके कन्द-मूल आदिसे निर्वाह न करके ग्रामीण आहारका संग्रह करेंगे और संन्यासी भी मित्र आदिके स्नेह-बन्धनमें बँधे रहेंगे। कलियुग आनेपर राजालोग प्रजाकी रक्षा नहीं करेंगे, अपितु कर लेनेके बहाने प्रजाके ही धनका अपहरण करनेवाले होंगे।* उस समय जिस-जिसके पास हाथी, घोड़े और रथ होंगे, वही-वही राजा होगा और जो-जो निर्बल होंगे, वे ही सेवक होंगे। वैश्यलोग कृषि, वाणिज्य आदि अपने कर्मोंको छोड़कर शूद्र-वृत्तिसे रहेंगे। शिल्प-कर्मसे जीवन-निर्वाह करेंगे। इसी प्रकार शूद्र भी संन्यासका चिह्न धारण करके भिक्षापर जीवन-निर्वाह करेंगे। वे अधम मनुष्य संस्कारहीन होते हुए भी लोगोंको ठगनेके लिये पाखण्ड-वृत्तिका आश्रय लेंगे। दुर्भिक्ष और करकी पीड़ासे अत्यन्त उपद्रवग्रस्त होकर प्रजाजन ऐसे देशोंमें चले जायँगे, जहाँ गेहूँ और जौ आदिकी अधिकता होगी। उस समय वेदमार्गका लोप, पाखण्डकी अधिकता और अधर्मकी वृद्धि होनेसे लोगोंकी आयु बहुत थोड़ी होगी। कलियुगमें पाँच, छः अथवा सात वर्षकी स्त्री और आठ, नौ या दस वर्षके पुरुषोंके ही संतानें होने लग जायँगी। बारह वर्षकी अवस्थामें ही बाल सफेद होने लगेंगे। घोर कलियुग आनेपर कोई मनुष्य बीस वर्षतक जीवित नहीं रहेगा। उस समय लोग मन्दबुद्धि, व्यर्थ चिह्न धारण करनेवाले और दुष्ट अन्तःकरणवाले होंगे; अतः वे थोड़े ही समयमें नष्ट हो जायँगे।

ब्राह्मणो ! जब-जब इस जगत्में पाखण्ड-वृत्ति दृष्टिगोचर होने लगे, तब-तब विद्वान् पुरुषोंको कलियुगकी वृद्धिका अनुमान करना चाहिये। जब-जब वैदिक मार्गका अनुसरण करनेवाले साधु पुरुषोंकी हानि हो, तब-तब बुद्धिमान् पुरुषोंको कलियुगकी वृद्धिका अनुमान करना चाहिये। जब धर्मात्मा मनुष्योंके आरम्भ किये हुए कार्य शिथिल हो जायँ, तब उसमें विद्वानोंको कलियुगकी प्रधानताका अनुमान करना चाहिये। जब-जब यज्ञोंके अधीश्वर


* अरक्षितारो हर्तारः शुल्कव्याजेन पार्थिवाः। हारिणो जनवित्तानां सम्प्राप्ते च कलौ युगे॥
(२२९।३४)

† यदा यदा हि पाखण्डवृत्तिरत्रोपलक्ष्यते। तदा तदा कलेर्वृद्धिरनुमेया विचक्षणैः॥
यदा यदा सतां हानिर्वेदमार्गानुसारिणाम्। तदा तदा कलेर्वृद्धिरनुमेया विचक्षणैः॥
प्रारम्भाश्चावसीदन्ति यदा धर्मकृतां नृणाम्। तदानुमेयं प्राधान्यं कलेर्विप्रा विचक्षणैः॥
(२२९।४४-४६)