संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished434 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ८५- श्रीहरिके अनेक अवतारोंका संक्षिप्त वर्णन... | ३४५ | ब्रह्मराक्षस और चाण्डालकी कथा ...... | ३९६ |
| ८६- यमलोकके मार्ग और चारों द्वारोंका वर्णन .. | ३५१ | ९७- श्रीविष्णुमें भक्ति होनेका क्रम और कलिधर्मका निरूपण | ४०१ |
| ८७- यमलोकके दक्षिणद्वार तथा नरकोंका वर्णन . | ३५५ | ९८- युगान्तकालकी अवस्थाका निरूपण | ४०५ |
| ८८- धर्मसे यमलोकमें सुखपूर्वक गति तथा भगवद्भक्तिके प्रभावका वर्णन | ३६१ | ९९- नैमित्तिक और प्राकृत प्रलयका वर्णन ...... | ४०८ |
| ८९- धर्मकी महिमा एवं अधर्मकी गतिका निरूपण तथा अन्नदानका माहात्म्य | ३६६ | १००-आत्यन्तिक प्रलयका निरूपण, आध्यात्मिक आदि त्रिविध तापोंका वर्णन और भगवत्तत्त्वकी व्याख्या | ४११ |
| ९०- श्राद्ध-कल्पका वर्णन | ३७० | १०१-योग और सांख्यका वर्णन | ४१५ |
| ९१- गृहस्थोचित सदाचार तथा कर्तव्याकर्तव्यका वर्णन | ३७८ | १०२-कर्म तथा ज्ञानका अन्तर, परमात्मतत्त्वका निरूपण तथा अध्यात्मज्ञान और उसके साधनोंका वर्णन | ४१९ |
| ९२- वर्ण और आश्रमोंके धर्मका निरूपण ...... | ३८५ | १०३-योग और सांख्यका संक्षिप्त वर्णन | ४२४ |
| ९३- उच्च वर्णकी अधोगति और नीच वर्णकी ऊर्ध्वगतिका कारण ...... | ३८७ | १०४-क्षर-अक्षर-तत्त्वके विषयमें राजा करालजनक और वसिष्ठका संवाद ...... | ४२६ |
| ९४- स्वर्ग और नरकमें ले जानेवाले धर्माधर्मका निरूपण | ३९० | १०५-क्षर-अक्षर तथा योग और सांख्यका वर्णन.. | ४२७ |
| ९५- भगवान् वासुदेवका माहात्म्य ...... | ३९४ | १०६-श्रीब्रह्मपुराणकी महिमा तथा ग्रन्थका उपसंहार | ४३० |
| ९६- श्रीवासुदेवके पूजनकी महिमा तथा एकादशीको भगवान्के मन्दिरमें जागरण करनेका माहात्म्य— |
चित्र-सूची
| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| १- मुनियोंका सूतजीसे प्रश्न | १० | १६- महर्षि कपिलके तेजसे सगर-पुत्रोंका भस्म होना | २५ |
| २- शतरूपाकी तपस्या | ११ | १७- चन्द्रमाके द्वारा पृथ्वीकी परिक्रमा ...... | २७ |
| ३- वेनके द्वारा महर्षियोंका तिरस्कार | १३ | १८- ऋचीक मुनिका अपनी पत्नी और सासके लिये पृथक्-पृथक् चरु बनाकर पत्नीके हाथमें देना | २९ |
| ४- वेनकी दाहिनी भुजाका मन्थन और पृथुका प्रादुर्भाव | १३ | १९- देवताओं और असुरोंका ब्रह्माजीसे विजयके लिये प्रश्न करना | ३१ |
| ५- गोरूपधारिणी पृथ्वी और राजा पृथुका वार्तालाप | १५ | २०- इन्द्रका रजिके पास जाना और अपनेको पुत्र कहकर परिचय देना | ३१ |
| ६- पृथुके राज्यमें शस्य-श्यामला पृथ्वी ...... | १६ | २१- ययातिका यदु आदिको शाप ...... | ३३ |
| ७- वैवस्वत मनुके यज्ञकुण्डसे इलाकी उत्पत्ति . | १९ | २२- ययातिका अपने छोटे पुत्र पूरुको बुढ़ापा लेनेके लिये कहना | ३३ |
| ८- रैवतका बलदेवजीको अपनी कन्या रेवतीका दान | २० | २३- कार्तवीर्य अर्जुनकी समुद्रमें जलक्रीडा | ३९ |
| ९- महर्षि उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुको मारनेका अनुरोध | २१ | २४- महर्षि पुलस्त्यका रावणको कार्तवीर्यके कारागारसे छुड़ाना | ३९ |
| १०- कुवलाश्वका युद्धके लिये प्रस्थान | २२ | २५- कार्तवीर्यको महर्षि वसिष्ठका शाप ...... | ४० |
| ११- धुन्धुका वध | २२ | २६- राजा ज्यामघका युद्धमें जीती हुई राजकन्याको पुत्रवधूके रूपमें अपने स्त्रीको देना | ४२ |
| १२- राजा त्रय्यारुणके द्वारा अपने कुपुत्रका त्याग . | २३ | २७- मणिके तेजसे प्रकाशित सत्राजित्को देखकर द्वारकावासियोंका आश्चर्य | ४४ |
| १३- सत्यव्रतके द्वारा विश्वामित्रपुत्र गालवका छुटकारा तथा भरण-पोषण ...... | २३ | ||
| १४- विश्वामित्रका सत्यव्रतको सशरीर स्वर्ग भेजना | २४ | ||
| १५- और्व मुनिका राजा बाहुकी गर्भवती पत्नीको पतिके साथ चितामें जलनेसे रोकना | २५ |