भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
८५- श्रीहरिके अनेक अवतारोंका संक्षिप्त वर्णन...३४५ब्रह्मराक्षस और चाण्डालकी कथा ......३९६
८६- यमलोकके मार्ग और चारों द्वारोंका वर्णन ..३५१९७- श्रीविष्णुमें भक्ति होनेका क्रम और कलिधर्मका निरूपण४०१
८७- यमलोकके दक्षिणद्वार तथा नरकोंका वर्णन .३५५९८- युगान्तकालकी अवस्थाका निरूपण४०५
८८- धर्मसे यमलोकमें सुखपूर्वक गति तथा भगवद्भक्तिके प्रभावका वर्णन३६१९९- नैमित्तिक और प्राकृत प्रलयका वर्णन ......४०८
८९- धर्मकी महिमा एवं अधर्मकी गतिका निरूपण तथा अन्नदानका माहात्म्य३६६१००-आत्यन्तिक प्रलयका निरूपण, आध्यात्मिक आदि त्रिविध तापोंका वर्णन और भगवत्तत्त्वकी व्याख्या४११
९०- श्राद्ध-कल्पका वर्णन३७०१०१-योग और सांख्यका वर्णन४१५
९१- गृहस्थोचित सदाचार तथा कर्तव्याकर्तव्यका वर्णन३७८१०२-कर्म तथा ज्ञानका अन्तर, परमात्मतत्त्वका निरूपण तथा अध्यात्मज्ञान और उसके साधनोंका वर्णन४१९
९२- वर्ण और आश्रमोंके धर्मका निरूपण ......३८५१०३-योग और सांख्यका संक्षिप्त वर्णन४२४
९३- उच्च वर्णकी अधोगति और नीच वर्णकी ऊर्ध्वगतिका कारण ......३८७१०४-क्षर-अक्षर-तत्त्वके विषयमें राजा करालजनक और वसिष्ठका संवाद ......४२६
९४- स्वर्ग और नरकमें ले जानेवाले धर्माधर्मका निरूपण३९०१०५-क्षर-अक्षर तथा योग और सांख्यका वर्णन..४२७
९५- भगवान् वासुदेवका माहात्म्य ......३९४१०६-श्रीब्रह्मपुराणकी महिमा तथा ग्रन्थका उपसंहार४३०
९६- श्रीवासुदेवके पूजनकी महिमा तथा एकादशीको भगवान्‌के मन्दिरमें जागरण करनेका माहात्म्य—

चित्र-सूची

विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
१- मुनियोंका सूतजीसे प्रश्न१०१६- महर्षि कपिलके तेजसे सगर-पुत्रोंका भस्म होना२५
२- शतरूपाकी तपस्या१११७- चन्द्रमाके द्वारा पृथ्वीकी परिक्रमा ......२७
३- वेनके द्वारा महर्षियोंका तिरस्कार१३१८- ऋचीक मुनिका अपनी पत्नी और सासके लिये पृथक्-पृथक् चरु बनाकर पत्नीके हाथमें देना२९
४- वेनकी दाहिनी भुजाका मन्थन और पृथुका प्रादुर्भाव१३१९- देवताओं और असुरोंका ब्रह्माजीसे विजयके लिये प्रश्न करना३१
५- गोरूपधारिणी पृथ्वी और राजा पृथुका वार्तालाप१५२०- इन्द्रका रजिके पास जाना और अपनेको पुत्र कहकर परिचय देना३१
६- पृथुके राज्यमें शस्य-श्यामला पृथ्वी ......१६२१- ययातिका यदु आदिको शाप ......३३
७- वैवस्वत मनुके यज्ञकुण्डसे इलाकी उत्पत्ति .१९२२- ययातिका अपने छोटे पुत्र पूरुको बुढ़ापा लेनेके लिये कहना३३
८- रैवतका बलदेवजीको अपनी कन्या रेवतीका दान२०२३- कार्तवीर्य अर्जुनकी समुद्रमें जलक्रीडा३९
९- महर्षि उत्तङ्कका राजा बृहदश्वसे धुन्धुको मारनेका अनुरोध२१२४- महर्षि पुलस्त्यका रावणको कार्तवीर्यके कारागारसे छुड़ाना३९
१०- कुवलाश्वका युद्धके लिये प्रस्थान२२२५- कार्तवीर्यको महर्षि वसिष्ठका शाप ......४०
११- धुन्धुका वध२२२६- राजा ज्यामघका युद्धमें जीती हुई राजकन्याको पुत्रवधूके रूपमें अपने स्त्रीको देना४२
१२- राजा त्रय्यारुणके द्वारा अपने कुपुत्रका त्याग .२३२७- मणिके तेजसे प्रकाशित सत्राजित्‌को देखकर द्वारकावासियोंका आश्चर्य४४
१३- सत्यव्रतके द्वारा विश्वामित्रपुत्र गालवका छुटकारा तथा भरण-पोषण ......२३
१४- विश्वामित्रका सत्यव्रतको सशरीर स्वर्ग भेजना२४
१५- और्व मुनिका राजा बाहुकी गर्भवती पत्नीको पतिके साथ चितामें जलनेसे रोकना२५