ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११२ संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण स्वेच्छाचारिणी और कलहप्रिया होती हैं। भूमण्डलकी कुलटाएँ, स्वर्गकी अप्सराएँ तथा व्यभिचारिणी स्त्रियाँ प्रकृतिका तामस अंश कही गयी हैं। नारद ! इस प्रकार प्रकृतिके सम्पूर्ण रूपका वर्णन कर दिया। वे सभी देवियाँ पृथ्वीपर पुण्यक्षेत्र भारतमें पूजित हुई हैं। दुर्गा दुर्गतिका नाश करती हैं। राजा सुरथने सर्वप्रथम इनकी उपासना की है। इसके पश्चात् रावणका वध करनेकी इच्छासे भगवान् श्रीरामने देवीकी पूजा की है। तत्पश्चात् भगवती जगदम्बा तीनों लोकोंमें सुपूजित हो गयीं। पहले दैत्यों और दानवोंका वध करनेके लिये ये दक्षके यहाँ प्रकट हुई थीं। परंतु कुछ कालके पश्चात् पिताके यज्ञमें स्वामीका अपमान देखकर इन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। फिर ये हिमालयकी पत्नीके उदरसे उत्पन्न हुईं। उस समय इन्होंने भगवान् शंकरको पतिरूपमें प्राप्त किया। गणेश और स्कन्द - इनके दो पुत्र हुए। गणेशको स्वयं श्रीकृष्ण माना जाता है। स्कन्द विष्णुकी कलासे उत्पन्न हुए हैं। नारद ! इसके बाद राजा मङ्गलने सर्वप्रथम लक्ष्मीकी आराधना की है। तत्पश्चात् तीनों लोकोंमें देवता, मुनि और मानव इनकी पूजा करने लगे। राजा अश्वपतिने सबसे पहले सावित्रीकी उपासना की; फिर प्रधान देवता और श्रेष्ठ मुनि भी इनके उपासक बन गये। सबसे पहले ब्रह्माने सरस्वतीका सम्मान किया। इसके बाद ये देवी तीनों लोकोंमें देवताओं और मुनियोंकी पूजनीया हो गयीं। सर्वप्रथम गोलोकमें रासमण्डलके भीतर परमात्मा श्रीकृष्णने भगवती राधाकी पूजा की है। गोपों, गोपियों, गोपकुमारों और कुमारियोंके साथ सुशोभित होकर श्रीकृष्णने राधाका पूजन किया था। उस समय कार्तिकी पूर्णिमाकी चाँदनी रात थी। गौओंका समुदाय भी इस उत्सवमें सम्मिलित था। फिर भगवान्की आज्ञा पाकर ब्रह्मा प्रभृति देवता तथा मुनिगण बड़े हर्षके साथ भक्तिपूर्वक पुष्प एवं धूप आदि सामग्रियोंसे निरन्तर इनकी पूजा- वन्दना करने लगे। इस भूमण्डलमें पहले राधादेवीकी पूजा राजा सुयज्ञने की है। ये नरेश पुण्यक्षेत्र भारतवर्षमें थे। भगवान् शंकरके उपदेशके अनुसार इन्होंने देवीकी उपासना की थी। फिर भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञा पाकर त्रिलोकीमें मुनिगण पुष्प एवं धूप आदि उपचारोंसे भक्ति प्रदर्शित करते हुए इनकी पूजामें सदा तत्पर रहने लगे। जो-जो कलाएँ प्रकट हुई हैं, उन सबकी भारतवर्षमें पूजा होती है। मुने ! तभीसे प्रत्येक ग्राम और नगरमें ग्रामदेवियोंकी पूजा होती है। नारद ! इस प्रकार आगमोंके अनुसार भगवती प्रकृतिका सम्पूर्ण शुभ चरित्र मैंने तुम्हें सुना दिया। अब और क्या सुनना चाहते हो ? (अध्याय १) परब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराधासे प्रकट चिन्मय देवी और देवताओंके चरित्र नारदजीने कहा-प्रभो ! देवियोंके सम्पूर्ण चरित्रको मैंने संक्षेपसे सुन लिया। अब सम्यक् प्रकारसे बोध होनेके लिये आप पुनः विस्तारपूर्वक उसका वर्णन कीजिये। सृष्टिके अवसरपर भगवती आद्यादेवी कैसे प्रकट हुईं? वेदवेत्ताओंमें श्रेष्ठ भगवन् ! देवीके पञ्चविध होनेमें क्या कारण है ? यह रहस्य बतानेकी कृपा करें। देवीकी त्रिगुणमयी कलासे संसारमें जो-जो देवियाँ प्रकट हुईं, उनका चरित्र मैं विस्तारके साथ सुनना चाहता हूँ। सर्वज्ञ प्रभो ! उन देवियोंके प्राकट्यका प्रसङ्ग, पूजा एवं ध्यानकी विधि, स्तोत्र, कवच, ऐश्वर्य तथा मङ्गलमय शौर्य - इन सबका वर्णन कीजिये। भगवान् नारायण बोले- नारद ! आत्मा, आकाश, काल, दिशा, गोकुल तथा गोलोकधाम-