भारतकोश
ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

Brahma Vaivarta Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished810 पृष्ठ

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पृष्ठ 129

प्रकृतिखण्ड ११९


स्वाहा' यह मन्त्रका स्वरूप है। इस मन्त्रका जप करनेसे सम्पूर्ण विघ्न टल जाते हैं।

ब्रह्मपुत्र नारद! मन्त्रोपदेशके पश्चात् परम प्रभु श्रीकृष्णने उस बालकके भोजनकी जो व्यवस्था की, वह तुम्हें बताता हूँ, सुनो! प्रत्येक विश्वमें वैष्णवजन जो कुछ भी नैवेद्य भगवान्‌को अर्पण करते हैं, उसमेंसे सोलहवाँ भाग विष्णुको मिलता है और पंद्रह भाग इस बालकके लिये निश्चित है; क्योंकि यह बालक स्वयं परिपूर्णतम श्रीकृष्णका विराट्-रूप है।

विप्रवर! सर्वव्यापी श्रीकृष्णने उस उत्तम मन्त्रका ज्ञान प्राप्त करानेके पश्चात् पुनः उस विराट्मय बालकसे कहा—'पुत्र! तुम्हें इसके सिवा दूसरा कौन-सा वर अभीष्ट है, वह भी मुझे बताओ। मैं देनेके लिये सहर्ष तैयार हूँ।' उस समय विराट् व्यापक प्रभु ही बालकरूपसे विराजमान था। भगवान् श्रीकृष्णकी बात सुनकर उसने उनसे समयोचित बात कही।

बालकने कहा—आपके चरणकमलोंमें मेरी अविचल भक्ति हो—मैं यही वर चाहता हूँ। मेरी आयु चाहे एक क्षणकी हो अथवा दीर्घकालकी; परंतु मैं जबतक जीऊँ, तबतक आपमें मेरी अटल श्रद्धा बनी रहे। इस लोकमें जो पुरुष आपका भक्त है, उसे सदा जीवन्मुक्त समझना चाहिये। जो आपकी भक्तिसे विमुख है, वह मूर्ख जीते हुए भी मरेके समान है। जिस अज्ञानीजनके हृदयमें आपकी भक्ति नहीं है, उसे जप, तप, यज्ञ, पूजन, व्रत, उपवास, पुण्य अथवा तीर्थ-सेवनसे क्या लाभ? उसका जीवन ही निष्फल है। प्रभो! जबतक शरीरमें आत्मा रहता है, तबतक शक्तियाँ साथ रहती हैं। आत्माके चले जानेके पश्चात् सम्पूर्ण स्वतन्त्र शक्तियोंकी भी सत्ता वहाँ नहीं रह जाती। महाभाग! प्रकृतिसे परे वे सर्वात्मा आप ही हैं। आप स्वेच्छामय सनातन ब्रह्मज्योतिःस्वरूप परमात्मा सबके आदिपुरुष हैं।

नारद! इस प्रकार अपने हृदयका उद्गार प्रकट करके वह बालक चुप हो गया। तब भगवान् श्रीकृष्ण कानोंको सुहावनी लगनेवाली मधुर वाणीमें उसका उत्तर देने लगे।

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—वत्स! मेरी ही भाँति तुम भी बहुत समयतक अत्यन्त स्थिर होकर विराजमान रहो। असंख्य ब्रह्माण्डोंके जीवन समाप्त हो जानेपर भी तुम्हारा नाश नहीं होगा। प्रत्येक ब्रह्माण्डमें अपने क्षुद्र अंशसे तुम विराजमान रहोगे। तुम्हारे नाभिकमलसे विश्वस्रष्टा ब्रह्मा प्रकट होंगे। ब्रह्माके ललाटसे ग्यारह रुद्रोंका आविर्भाव होगा। शिवके अंशसे वे रुद्र सृष्टिके संहारकी व्यवस्था करेंगे। उन ग्यारह रुद्रोंमें 'कालाग्नि' नामसे जो प्रसिद्ध हैं, वे ही रुद्र विश्वके संहारक होंगे। विष्णु विश्वकी रक्षा करनेके लिये तुम्हारे क्षुद्र अंशसे प्रकट होंगे। मेरे वरके प्रभावसे तुम्हारे हृदयमें सदा मेरी भक्ति बनी रहेगी। तुम मेरे परम सुन्दर स्वरूपको ध्यानके द्वारा निरन्तर देख सकोगे, यह निश्चित है। तुम्हारी कमनीया माता