ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीकृष्णजन्मखण्ड ४४७ गोपियाँ अन्यान्य गोपोंके घरोंमें गयीं। गोप- उन्हें कंसने तत्काल मार डाला। इस तरह उनके गोपियोंसहित श्रीराधाके भूतलपर चले जानेपर छः पुत्रोंको उसने कालके गालमें डाल दिया। श्रीहरि भी शीघ्र ही वहाँ पहुँचनेके लिये उत्सुक देवकीका सातवाँ गर्भ शेषनागका अंश था, जिसे हुए। गोलोकके गोपों और गोपियोंसे बात करके योगमायाने खींचकर गोकुलमें निवास करनेवाली उन्हें अपने-अपने कामोंमें लगाकर मनकी गतिसे रोहिणीजीके गर्भमें स्थापित कर दिया। फिर वह चलनेवाले जगदीश्वर श्रीहरि मथुरामें जा पहुँचे। श्रीहरिकी आज्ञासे चली गयी। पहले देवकी और वसुदेवके जो-जो पुत्र हुए, (अध्याय ६) श्रीकृष्णजन्म-वृत्तान्त - आकाशवाणीसे प्रभावित हो देवकीके वधके लिये उद्यत हुए कंसको वसुदेवजीका समझाना, कंसद्वारा उसके छः पुत्रोंका वध, सातवें गर्भका संकर्षण, आठवें गर्भमें भगवान्का आविर्भाव - देवताओंद्वारा स्तुति, भगवान्का दिव्य रूपमें प्राकट्य, वसुदेवद्वारा उनकी स्तुति, भगवान्का पूर्वजन्मके वरदानका प्रसङ्ग बताकर अपनेको व्रजमें ले जानेकी बात बता शिशुरूपमें प्रकट होना, वसुदेवजीका व्रजमें यशोदाके शयनगृहमें शिशुको सुलाकर नन्द-कन्याको ले आना, कंसका उसे मारनेको उद्यत होना, परंतु वसुदेवजी तथा आकाशवाणीके कथनपर विश्वास करके कन्याको दे देना, वसुदेव- देवकीका सानन्द घरको लौटना नारदजीने पूछा- महाभाग ! श्रीकृष्णका जन्म- फलरूपसे ही उन्होंने श्रीहरिको पुत्ररूपसे प्राप्त वृत्तान्त महान् पुण्यप्रद और उत्तम है। वह जन्म, किया था। देवमीढ़द्वारा मारिषाके गर्भसे महान् मृत्यु और जराका नाश करनेवाला है। अतः आप पुरुष वसुदेवका जन्म हुआ। उनके जन्मकालमें इस प्रसङ्गको कुछ विस्तारके साथ बतलाइये। अत्यन्त हर्षसे भरे हुए देवसमुदायने आनक और वसुदेव किसके पुत्र थे और देवकी किसकी दुन्दुभि नामक बाजे बजाये थे। इसलिये श्रीहरिके कन्या थीं? देवकी और वसुदेव पूर्वजन्ममें कौन जनक वसुदेवको प्राचीन संत-महात्मा 'आनकदुन्दुभि' थे ? उनके विवाहका वृत्तान्त भी बताइये। अत्यन्त कहते हैं। यदुकुलमें आहुकके पुत्र श्रीमान् देवक क्रूर स्वभाववाले कंसने देवकीके छः पुत्रोंका वध हुए थे, जो ज्ञानके समुद्र कहे जाते हैं। उन्हींकी क्यों किया ? तथा श्रीहरिका जन्म किस दिन पुत्री देवकी थीं। यदुकुलके आचार्य गर्गने हुआ ? यह सब मैं सुनना चाहता हूँ। आप वसुदेवके साथ देवकीका विधिपूर्वक यथोचित कृपापूर्वक कहिये। विवाहसम्बन्ध कराया था। देवकने विवाहके श्रीनारायणने कहा - महर्षि कश्यप ही लिये बहुत सामान एकत्र किये थे। उन्होंने उत्तम वसुदेव हुए थे और देवमाता अदिति देवकीके लग्नमें अपनी पुत्री देवकीको वसुदेवके हाथमें समर्पण रूपमें अवतीर्ण हुई थीं। पूर्वजन्मके पुण्यके कर दिया। नारद ! देवकने दहेजमें सहस्रों घोड़े,