भारतकोश
ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है

Brahmacharya Hi Jeevan Hai

स्वामी शिवानन्द द्वारा

स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

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आत्रहितकारी पुस्तकमाला

के

स्थायी ग्राहक बनने के नियम

( १ ) इस ग्रन्थ माला में नवयुवकोपयोगी सदाचार स्वास्थ्य, नीति तथा चरित सम्बन्धी मौलिक तथा अनुवादित पुस्तकें प्रकाशित की जाती हैं ।

( २ ) इसमें इतिहास, जीवनी, उपन्यास, नाटक गल्प, तथा, अन्य साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित की जाती हैं जो उपर्युक्त उद्देश्य की पूर्ति करें ।

( ३ ) प्रत्येक सज्जन ॥) पेशगी जमा कर इस ग्रन्थमाला के स्थायी ग्राहक बन सकते हैं । उन्हें प्रत्येक प्रकाशित पुस्तक पर एक चौथाई कमीशन दिया जाता है ।

( ४ ) पहले की प्रकाशित पुस्तकों का लेना अथवा न लेना ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर है । परन्तु भविष्य में प्रकाशित होने वाली पुस्तकों का लेना आवश्यक होगा । यदि सूचना पाते ही सूचित कर देंगे तो वह पुस्तक न भेजी जायगी ।

सैनेजर-आत्रहितकारी पुस्तकमाला, दारागंज, प्रयाग