ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
DevanagariHindipublished199 पृष्ठ
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❁ ब्रह्मचर्य ही जीवन है ❁
चित्र नम्बर ४
१ आसन ४
इस आसन में तो एक गढ़ेला रख ले बना लेना चाहिये जो मतलब यह है कि इस नहीं होनी चाहिये। सख्त का भय रहता है। इसलि मुलायम और गुदगुदे धर दीवाल का सहारा लेकर।
शीर्षासन