ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
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के अनुसार मन, क्रम, वचन से चलना होगा। जो मनुष्य इन नियमों के अनुसार केवल दो ही साल तक चलेगा उसका जीवन-प्रवाह बिल्कुल ही बदल जायगा, शरीर और मन में अद्भुत परिवर्तन होगा, पापात्मा भी निःसंशय पुरयात्मा बन जायगा ! व्यभिचारी भी ब्रह्मचारी बन जायगा !! और दुर्बल भी सिंह तथा दुरात्मा भी साधु महात्मा बन सकेगा !!!
पर हाँ, नियमों को किसी कारण तोड़ना न होगा ! उन्हें दृढ़ता के साथ निवाहना होगा। यदि कोई जीवन-पर्यन्त इन नियमों के अनुसार चले तो फिर कहना ही क्या है ? वह इस मृत्युलोक में ही देवता के तुल्य पूजनीय बन जायगा, इसमें कोई सन्देह नहीं है।
इस ग्रन्थ में दिये हुये ब्रह्मचर्य-पालन के नियम अत्यन्त ही सरल व सुलभ हैं। उनमें एक कौड़ी का भी खर्च नहीं है। जैसे हम पालन कर रहे हैं वैसे आप भी पालन कर सकते हैं। यदि दिल से निश्चय करलो तो क्या नहीं हो सकता ? “Resolution is victory” अर्थात् निश्चय ही वल है और निश्चय ही फल है !
प्रत्येक मनुष्य में ईश्वरीय शक्ति वास कर रही है। दया, क्षमा, शान्ति, परोपकार, भक्ति, प्रेम, वीरता, स्वतंत्रता, सत्य और कृकर्म से अरुचि इन सब के अंकुर हृदय में रक्खे हुए हैं चाहे उन्हें सींच कर बढ़ावो चाहे सुखा दो ?
परमात्मा सब को सुवृद्धि प्रदान करे और उनका उद्धार करे !
सब का नम्र वन्द्य—
शिवानन्द
ॐ ! ॐ !! ॐ !!!