भारतकोश
ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है

Brahmacharya Hi Jeevan Hai

स्वामी शिवानन्द द्वारा

स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

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❁ वैद्य व डाक्टर ❁

[ १९ ]

देना ही बुद्धिमान्नी व सुरक्षितता है और यही माता-पिता तथा गुरुजनों का पवित्र कर्तव्य है। यदि गुरुजन अच्छे अच्छे कामों द्वारा अच्छे ढंग से बालक-बालिकाओं को ब्रह्मचर्य की केवल पन्द्रह मिनट स्कूलों में या घर ही पर बढ़िया शिक्षा दें, तो क्या ही अच्छा हो? हम पूर्ण विश्वास से कह सकते हैं कि भारत का इससे अति शीघ्र उद्धार हो सकता है। अतः माता-पिताओं ! सावधान !!

५—वैद्य व डाक्टर

माता-पिता तथा गुरुजनों की लापरवाही के कारण कई अच्छे बालक कुसंग में पड़कर विगड़ जाते हैं। वीर्य-नाश व व्यभिचार के कारण वे अनेकानेक दारुण रोगों से आक्रान्त हो जाते हैं; फिर वे वैद्य व डाक्टरों के मकान व दूकान छिपे छिपे दूँढ़ने लगते हैं। कोई मदनमंजरी पिल्स, धातुपुष्टि की गोलियाँ, वीर्यगुटिका, नपुंसकारिघृत, कोई जड़ी, बूटी, लेह, पाक चूर्ण आदि दूर दूर से मँगवाते हैं; और बेचारे लाभ की जगह, और भी तन से, मन से व धन से वर्वाद हो जाते हैं; इसका कारण यह है कि जितनी धातु-पौष्टिक औषधियाँ होती हैं वे सब कामोत्तेजक होती हैं; उनके सेवन से शरीर में यदि कुछ ताकत भी दीख पड़ती हो तो यह केवल मनुष्य की भावना तथा उस औषधि के साथ खाने हुये दूध मलाई आदि का प्रभाव है। संसार में ऐसा कोई भी वैद्य समर्थ नहीं है कि जो द्वादर्पन द्वारा वीर्यहीन को वीर्यवान् अर्थात् ब्रह्मचारी बना सकता हो। यदि कोई ऐसा कहें