भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

पृष्ठ 117, कुल 237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 117

१०२

महाचय साधना

जलाकर भस्म कर डालती है, ठीक उसी प्रकार सत्संग भी मनुष्यों के अज्ञान, कामुक संस्कार तथा दुष्कर्मों को जलाकर उुरत भस्म कर देता है। यही कारण है कि भगवान् शंकर तथा अन्य महात्माओं ने अपने ग्रन्थों में सत्संग की इस प्रकार बड़ी भारी महिमा वर्णन की है।

यदि आदको अपने स्थान में उचित सत्संग नहीं प्राप्त हो सके तो आप ऋषिकेश, बनारस, नासिक, प्रयाग, हृदिहार आदि तीर्थ स्थानों की यात्रा कीजिए। सद्भ्रमं कर अभ्ययन भी एक प्रकार का सत्संग है। विवेक, वैराग्य तथा मुमुक्षत्व प्राप्त करने के लिए सत्संग एकमात्र शक्तिशाली महीषधि है।

कामुकता को किस प्रकार हटाया जाय ? सृति के द्वारा वामना और मंस्कारों के तह से मन में संकल्प की उत्पत्ति होता है। संकल्प से आसक्ति होती है। संकल्प के साथ ही भासुकता और प्रवृत्ति उत्पन्न होते हैं। भासुकता और प्रवृत्ति पास पास रहते हैं। तत्पश्चात कामेच्छा उत्पन्न होती है, जिसके द्वारा मन और शरीर में उत्तेजना उत्पन्न हो जाती है। कामदेव के पास मोहन, स्तंभन, उन्मादन, शोषण और तपन रूपी पुष्प-शाखों से अलंकृत एक सुंदर धनुष रहता है। पहिले पहिले मोहन का ही नाश कीजिये। तपन का आक्रमण नहीं होगा। जिस प्रकार घट के भीतर भरा हुआ पानी छन या चूकर बाहर सतह पर निकल आता है, ठीक उसी प्रकार उत्तेजक संताप भी सूक्ष्म मनसे छनकर स्थूल शरीर में प्रवेश करता है। यदि आप पूर्ण सावधान हैं तो आप आरंभ ही में उठने वाले संकल्प का नाश कर सकते हैं ताकि निकटवर्ती आपत्ति का खटका ही न रहे। यदि आप संकल्प रूपी चोर को प्रथम द्वार में प्रवेश होने