ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविशेष उपदेश
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से न रोक सकें तो फिर दूसरे द्वार पर पूरे सावधान रहिये जब कि कामुक उत्तेजना प्रकट होने लगे। आप अबलें कामुक उत्तेजना को सहज ही में रोक सकते हैं ताकि वह जननेन्द्रिय तक पहुँच ही न सके। हठ यौगिक क्रियायें तथा प्राणायाम द्वारा वीर्य शक्ति को मस्तिष्क की ओर ले जाकर ओज शक्ति में परिणत कीजिये। मन को हटाइये। ऊँ अथवा किसी भी अन्य मंत्र का एकाग्र चित्त से उच्चारण कीजिये। प्रार्थना कीजिये। ध्यान कीजिये। यदि इस पर भी आप अपने मन पर नियंत्रण करने में असमर्थ हों तो फिर सत् संग की शरण लीजिये, अकेले न रहिये जब प्रबल कामुक उत्तेजना एकाएक प्रकट होकर जननेन्द्रिय तक पहुँच जाती है तो आप सब कुछ भूलकर मदाम्ब हो जाते हैं। आप काम के शिकार बन जाते हैं। पश्चात् आप पश्चाताप करने लगते हैं।
विशेष उपदेश
कामेच्छा और तत्संबंधी संस्कारों का संपूर्णतया नाश व आत्म-साक्षात्कार होने पर ही हो सकता है। यौगिक साधनों तथा ध्यानादि के द्वारा कामेच्छा का बहुत अधिक सीमा तक हास किया जा सकता है। गीता अध्याय २ श्लोक ४६ में देखिए “यद्यपि इन्द्रियों के द्वारा विषयों को न ग्रहण करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परन्तु राग नहीं निवृत्त होता, परन्तु इस पुरुष (स्थिर बुद्धि) का तो राग भी परमात्मा को साक्षात्कार करके निवृत्त हो जाता है।”
एक कामी अविवाहित पुरुष के सदा ऐसे विचार हुश्रा करते हैं “मैं कब एक युवती पत्नी के साथ जीवन यापन करने में समर्थ हो सकूँगा?” एक उदासीन ग्रहस्थी जिस