भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य साधना

योग मार्ग में अनेकानेक प्रलोभन और वाधाएँ हैं।

यह स्थांतरण (पूर्ण ब्रह्मचर्य या पवित्रता) आप प्राप्त कर सकते हैं : यदि आप उसे प्राप्त करना चाहें। मार्ग अत्यन्त सरल, सीधा, और सुगम है, यदि आप उसको सकफ़ी और यदि आप में धैर्य, लगन, संकल्प और दृढ़ हल्का हो, और यदि आप इन्द्रिय दमन, सदान्दार, दृढ़ विचार, सत् कार्य, निदिध्यासन, तत्परता, आत्म संकेत और आत्म विचार (मैं कौन हूँ ?) आदि बातों का अभ्यास करें। आत्मा विकार रहित है। इसका अनुभव कीजिए। क्या नित्य शुद्ध आत्मा में कहीं काम वासना या अपवित्रता का लेश-मात्र भी पाया जा सकता है ?

आप सबों के भीतर एक गुप्त श्रेयस्पीयर या कालीदास, एक गुप्त वर्डसवर्थ या बाल्मीकि, सेन्ट जेवियर, ब्रह्मचारी भीष्म पितामह, हनुमान या लक्ष्मण, विश्वामित्र या वशिष्ठ, डाक्टर जे० सी० बोस या रमण महर्षि, योगी शान्देव या गोरखनाथ, वेदान्ती शंकर या रामानुज, भक्त तुलसीदास, रामदास या एकनाथ आदि मिल सकते हैं। एतदर्थ ब्रह्मचर्य के द्वारा अपनी प्रसुप्त गुप्त शक्तियों को जाग्रत कीजिए और जन्म, मरण और चिंताओं से सने हुए इस सांसारिक जीवन के दुःखों को पार कर शीघ्र आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कीजिए।

धन्य है वह ब्रह्मचारी जिसने आजन्म ब्रह्मचर्य प्रतधारण करने का संकल्प किया है। धन्य है, धन्य है वह ब्रह्मचारी जो कामवासना को दग्ध करने तथा पूर्ण पवित्रता प्राप्त करने के लिए वास्तविक प्रयत्न कर रहा है। धन्य है, धन्य है यह ब्रह्मचारी जिसने कामवासना को संपूर्णतया नष्ट कर आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर लिया है। ऐसे प्रशंस-